परिचय (Introduction)
गुंजा, जिसे हम साधारण भाषा में रत्ती के नाम से भी जानते हैं |इसे लोग ज्यादातर रत्ती के नाम से ही जानते हैं|अंग्रेजी में jaquirity के नाम से भी जाना जाता है| साथ ही इसका Botanical name Abrus precatorius है| एवं यह विशेष रूप से LEGUMINOSAE (FABACEAE) के जाति का पौधा होता है|
इस पौधे की विशेषता यह है कि यह हरी पत्तेदार एवं लता के रूप में पाई जाती है|खासकर या थोड़ी बहुत जंगल झाड़ क्षेत्र में पाई जाती है|यह जंगली एवं पठारी क्षेत्र पर पाई जाती है|इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अपने बीजों के लिए जानी जाती है|इसके बीच जब तैयार होते हैं तो वह गहरे लाल रंग के होते हैं|जो कि वही भाग मुख्य रूप से औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है|

किसी औषधि गुन की वजह से यह भारतीय इतिहास के आयुर्वेदिक जगत में शुरू से ही इस्तेमाल किया गया है|बहुत सारे लोगों को इसके औषधीय लाभों के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं है|इसके किस भागों के औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है|खासकर इसके इस्तेमाल होने वाले अंगों में सबसे पहले इनके जड़,पत्तों एवं ज्यादात्तर इसके बीजों का प्रयोग किया जाता है|
आईए आज इस लेख के माध्यम से हम गुंजा(रत्ती)के बेहतरीन एवं शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि लाभों के बारे में विस्तार से जानेंगे|यह हमारे जीवन में औषधि के रूप में कितना कारगर होता है एवं हमें इसका इस्तेमाल कैसे करना चाहिए साथ ही इसके अन्य लाभों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे|
गुंजा(रत्ती) क्या है?What i s jaquirity(Abrus Precatorius)
गुंजा को हम अन्य नाम से भी जानते हैं| जैसे खासकर इस हमारे साधारण बोलचाल की भाषा में रत्ती के नाम से भी जाना जाता है| जैसे की अंग्रेजी में इसे jaquirity(Abrus precatorius) के नाम से भी जाना जाता है|इसे विज्ञान की भाषा में FABACEAE LEGUMINOSAE कहा जाता है | इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में यह है कि इस पौधे को बहुत प्रकार से औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है| इसके जड़ों को भी औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है साथ ही इसके पत्तों एवं बीज का भी प्रयोग किया जाता है|
सबसे खास बात इसके स्वरूप का यह देखने में इमली के पत्तों के समान दिखाई देता है|इसके पत्तों की विशेषता बहू वर्षआयू चक्ररोहिल्लता के समान साथ ही इसके पत्ते संयुक्त पक्षाकार के होते हैं | इस के फूलों का रंग सफेद या फिर गुलाबी रंग का होता है|जो की देखने में बहुत ही आकर्षक होता है|फूलों का साइज थोड़े छोटे-छोटे होते हैं|
इनमें सबसे खास बात इसके बीजों की होती है|जो कि इसके बीज चमकीले एवं सुंदर होते हैं|यह लाल रंग जैसे सिंदूर का रंग होता है|और इन लाल रंग के बीच में काले रंग का दाग होता है|
साथ ही इसका स्वाद तिक्षण होता है|
इसमें पाए जाने वाले मुख्य रासायनिक संगठन
गुंजा(रत्ती )की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस पौधे में बहुत सारे रासायनिक गुण की भरमार है| यह विभिन्न प्रकार के रासायनिक संगठनों से भरा पूरा होता है|जिस कारण इसे आर्युवेदिक जगत में बेहतरीन औषधि के रूप में इस्तेमाल में लाया जाता है|
जिसमें से मुख्य रूप से इसके बीजों में लुपिल एसीटेट, स्टोस्टोरोल,सुक्रोज,गार्लिक अमल,ओरिएंटेड,आइसो ओरिएंटेन,रसिक अम्ल,हेमा ग्लूटेनिन इत्यादि पाए जाते हैं|
साथ ही साथ इसके जड़ों में भी भरपूर मात्रा में रासायनिक संगठनों का मिश्रण पाया जाता है|विशेष कर इसकी जड़ों में स्टिग्मा स्ट्रॉल,ग्लाइसिन,इस्पार्टिक अमल,टायरोसिन जैसे महत्वपूर्ण रासायनिक तत्वों का मिश्रण पाया जाता है|
साथ ही इसके पत्तों में प्रीकोल,अब्रॉल,अब्रोसिन,प्रिकसीन नमक रासायनिक तत्वों का मिश्रण होता है|
इस प्रकार से गुंजा में बहुत सारे रासायनिक संगठनों का मिश्रण पाया जाता है|जिसके कारण इसका आयुर्वेदिक जगत में बहुत ही बड़ा महत्व है|यह औषधि के रूप में कई वर्षों से प्रचलित है|
गुंजा के हमारे जीवन में स्वस्थ लाभ एवं गुण(The health benefits & uses of gunja in our daily life)
गुंजा के हमारे स्वस्थ जीवन में बहुत ही बड़ा लाभ होता है इसमें विभिन्न प्रकार के बीमारियों से बचने का काम करती है|इसमें बहुत सारे गुण का मिश्रण होता है|इसमें निम्नलिखित प्रकार के गुण पाए जाते हैं जो की हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही उपयोगी होता है|
इसमें विरेचक के गुण पाए जाते हैं
विरेचक एक ऐसा गुण होता है जो कि शरीर के आतो की बेहतर तरीके से सफाई करता है|साथ ही पेट को साफ रखता है|साधारणत: आयुर्वेदिक जगत में इसका इस्तेमाल कब्ज दूर करने के लिए किया जाता है|
इसमें वमनकारी गुण होते हैं जो कि उल्टी कराने की औषधि के रूप में काम आती है
विशेष रूप से इसका प्रयोग उल्टी कराने के लिए भी किया जाता है|विशेष कर इसकी आवश्यकता तब पड़ती है जब कोई व्यक्ति किसी प्रकार का कोई विश्सात पदार्थ खा लिया हो|
कामोत्जना या कामवर्धक को बढ़ाने के लिए
इस औषधि का प्रयोग यौन इच्छा को बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है|साथ ही इसके प्रयोग से कामइच्छा को उत्तेजित करने में सहायक होती है|विशेष कर यहां कामोंत्तेजक गुण के लिए जाना जाता है|
शरीर में होने वाले ऐंठनो को रोकते हैं|
इसमें बहुत सारे लाभदायक गुना के साथ-साथ सबके विशेष में यह है कि यह शरीर में होने वाली ऐंठन को रोकते हैं|जो कि पेट या फिर शरीर के अन्य जगह हो की मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने या फिर उसे दुरुस्त करने में सहायक करती है|इसीलिए इसे ऐंठन या मरोड़ नाशक औषधि के रूप में भी जाना जाता है|
खासकर इसका उपयोग पेट में दर्द महिलाओं को मासिक धर्म के समय होने वाले मरोड़,साथ ही आतो में होने वाले ऐंठन इत्यादि में बहुत ही उपयोगी माना जाता है|
हमारे दैनिक जीवन में गुंजा का उपयोग(use of gunja in our daily life)
आज के भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय एवं जानकारी का अभाव है|इसलिए थोड़ी बहुत किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या होने पर हर चीजों के लिए मेडिसिन का इस्तेमाल करते हैं|जिसके परिणाम बहुत ही बुरा होता है|क्योंकि एक समस्या को खत्म करने के लिए अपनाई गई मेडिसिन की वजह से साथ में कई और समस्याओं का अपनी ओर आकृष्ट किया जाता है|
इन्हीं कारण को देखते हुए हमें मेडिसिन का इस्तेमाल कम करना चाहिए और प्राकृतिक औषधियां की तरफ ध्यान देना चाहिए|परंतु इन औषधीय का इस्तेमाल कैसे किया जाता हैइसके लाभ हानि क्या है| इसकी जानकारी भी होनी चाहिए|इसे आप अपने दैनिक जीवन में किस तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं| साथ ही इससे मिलने वाले लाभों के लिए कुछ सावधानियां का पालन किस तरीके से किया जाता है|
गुंजा का आयुर्वेदिक औषधि गुण में तांत्रिका विकार एवं नसों में होने वाली बीमारियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है(use in nervous disorder)
यह मस्तिष्क में होने वाली रीड की हड्डी एवं नसों में होने वाली समस्याओं को दूर करती है|
कुछ समस्याएं जैसे:
- न्यूरोपैथी(Neuropathy)
- मिर्गी ( Epilepsy)
- पैरालिसिस(paralysis)
इन सभी समस्याओं के लिए गुंजा का उपयोग किया जाता है|यह बहुत ही लाभदायक आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है|
पशु विषाक्तता एवं पशुओं के द्वारा विषाक्त भोजन के ग्रहण इत्यादि के लिए(Cattle poisoning)
यदि जब कोई पालतू पशु जैसे गाय, भैंस ,बकरी इत्यादि पशु किसी भी प्रकार के कोई जहरीला पदार्थ को खा लेते हैं तो गुंजा(रत्ती)का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है जैसे कि :
- जहरीला पानी पीने पर
- किसी प्रकार के रासायनिक खाद या कीटनाशक को खाने पर
- कभी-कभी जहरीले पौधे को खाने पर
इन सारी कारण के लिए भी गुंजा का बेहतरीन रूप से इस्तेमाल किया जाता है|
महिलाओं के मासिक धर्म को शुरू करने में मदद करती है|साथ ही साथ उसे नियमित रखने में भी कारगर होती है|(Emmenagogues)
इसे गर्भपात उत्पन्न करने वाली आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है|(Abortifacient)
गुंजा(रत्ती) को जीवाणु रोधी एवं बैक्टीरियानाशक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी जाना जाता है|यह औषधि के इस्तेमाल से बैक्टीरिया को नष्ट करने या फिर उनकी वृद्धि को रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है|
कृमिहरि एवं कृमि नाशक औषधि के रूप में(Anthelmintic)
इस औषधि के दैनिक इस्तेमाल से शरीर में मौजूद कृमियों(Worms)को नाश करने में सहायता मिलती है|जैसे कि आत के कीड़े(intestinal worms) इत्यादि को नाश किया जाता है|
कुष्ठ रोधी एवं कुष्ठ रोग बीमारियों के नाशक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है (Antileprotic)
सामान्यत: यह आयुर्वेदिक औषधि कुष्ठ रोगियों के इलाज के लिए बेहतरीन मानी जाती है|साथ ही यह बहुत सारी नुकसानदायक बैक्टीरिया को मारने का काम करती है|
यह मांसपेशियों को शिथिलता प्रदान करती है एवं मांसपेशी शिथिलिक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में जाना जाता है(Muscle relaxant)
इस आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग तब किया जाता है जब शरीर की सिकुड़ी हुई मांसपेशी हो या फिर ऐंठन वाली मांसपेशियों को ढीला करने के लिए इस्तेमाल की जाती है|साथ ही यह शरीर की मांसपेशी के तनाव को कम करती है| और तो और यह शरीर की मांसपेशियों के तनावों को कम करती है|
गुंजा(रत्ती ) के कुछ महत्वपूर्ण लाभ(Important benefits of Gunja)
गुंजा के बहुत सारे महत्वपूर्ण लाभ होते हैं| यदि आप इसे बेहतरीन लाभ लेना चाहते हैं तो आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है|
- यदि आप इसके पत्तों को मिश्री के साथ चूसते हैं तो आपको स्वरभंग में लाभ मिलता है|
- इसके जड़ों को पीसकर रात को दूध के साथ दो चम्मच खाना खाने से पहले लेते हैं तो वीर्य संबंधित समस्याओं से मुक्ति मिलती है|
- श्वेत कुष्ठ में भी लाभकारी होता है|
- इसका प्रयोग आप गंजापन की समस्याओं को दूर करने के लिए भी कर सकते हैं|आपको रत्ती का चूर्ण को पानी में मिलकर इसका लेप सर में बार-बार लगाना होता है इस विधि से बाल आने की संभावना बढ़ती है|
- कुष्ठ रोगियों के लिए भृंगराज में रत्ती का चूर्ण मिलाकर तेल को सिद्ध करना चाहिए और इस तेल का लेप करना चाहिए इससे बहुत लाभ मिलता है|
- साइटिका नाड़ी में गूंजकलक लेप करने से बहुत ही आराम मिलता है|
- दातों के कृमियों को दूर करने के लिए गुंजा के ताजा जड़ों का दातुन करना चाहिए, इससे दांतों के अंदर के कृमि नष्ट होते हैं|
- इसका इस्तेमाल बहुत सारे आयुर्वेदिक औषधि कार्यों के लिए किया जाता है|ज्यादातर इसमें गुंजा के बीज का उपयोग होता है|इससे गले की विभिन्न बीमारियों को ठीक किया जाता है|गुंजा के हरे पत्तों को कंकोल के साथ चबाने से,साथ ही इसका रस गले से नीचे उतरने से स्वरभेद एवं गले की परेशानियों से आराम मिलता है|
गुंजा(रत्ती) के कुछ दुष्प्रभाव एवं सावधानियां(some side effect of Gunja)
गुंजा का प्रयोग हमेशा सावधानी पूर्वक ही करना चाहिए,खासकर इसका प्रयोग हमेशा किसी आयुर्वेदिक औषधि के विशेषज्ञ की देखभाल में ही करनी चाहिए इसे खुद से बिना जानकारी के इस्तेमाल से बचे| खासकर इसके कच्चे फलों से|
इसे बिना जानकारी के एवं बिना शोध के बीजों का प्रयोग ना करें| यह नुकसानदायक हो सकता है|
हमेशा इसका इस्तेमाल आयुर्वेद के विशेषज्ञों की देखरेख में ही करें
विशेष कर इसके शोध के बाद आपको इसके बीजों को गाय के दूध में अच्छी तरह उबालकर,छिलके को निकाल कर गर्म पानी से धोकर ही प्रयोग करना चाहिए|
निष्कर्ष
हमें इस लेख के माध्यम से गुंजा(रत्ती) के आयुर्वेदिक औषधि गुण को एवं हमारे जीवन में इसके विशेष महत्व के बारे में विस्तार से जाना|
आज के इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग शारीरिक एवं मानसिक रूप से बीमार पड़ते जा रहे हैं|साथी विभिन्न प्रकार के रासायनिक मेडिसिन का प्रयोग कर रहे हैं जो कि हमारे लिए बहुत ही नुकसान हो रहा है|इसलिए थोड़ा सा समय निकालकर हमें आयुर्वेदिक औषधियां के बारे में जानने की आवश्यकता है क्योंकि यह औषधीय प्राचीन काल से ही मानव जीवन के लिए उपयोगी साबित हुई है|जो किसी भी प्रकार के नुकसान से दूर है|यदि आप अपने जीवन शैली में आयुर्वेदिक औषधियां का इस्तेमाल करके अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाना चाहते हैंतो यह आपके स्वास्थ्य एवं जिंदगी को बेहतर बनाएगी|
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल जवाब
Q.क्या गुंजा(रत्ती) का प्रयोग हर दिन करना चाहिए?
A.बिल्कुल,परंतु इसके लिए आपको इसकी सही मात्रा एवं सही समय की जानकारी होनी चाहिए|
Q.क्या इसे कच्चे खाने से नुकसान हो सकता है?
A.इसे आप कभी भी कच्चा नहीं खा सकते, यह कड़वा होता है|
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written by Suraj Horo