HomeNEW UPDATESatawer kya hai ! Swad ,Ucharan aur Fayde janiye Isse Judi khas...

Satawer kya hai ! Swad ,Ucharan aur Fayde janiye Isse Judi khas baten

Table of Contents

INTRODUCTION

Satawer kya hai,शतावर,साधारण बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल किया जाता है परंतु इससे और भी कई नाम से भी जाना जाता है|हिंदी में इसे शतावर या सतमूली कहा जाता है |अंग्रेजी में Asparagus कहा जाता है|इसका वैज्ञानिक(Botanical name) नाम Wild LILIACEAE है|क्योंकि यह Wild LILIACEAE जाति के पौधे से ताल्लुक रखता है|

साधारणत: यह जंगली एवं पहाड़ी इलाकों में ज्यादातर पाया जाता है|भारतीय आयुर्वेदिक जगत में इसका विशेष महत्व है|इसकी आवश्यकता को देखते हुए अब बहुत से जगहो पर विशेष मात्रा में इसकी खेती की जाती है|साथ ही साथ आयुर्वेद औषधि में इसका बहुत ही बहुमूल्य योगदान रहा है|

satawer

इस पौधे की विशेषता एवं आकार की बात की जाए तो इसका स्वरूप यह एक पौधे के रूप में विशाल एवं घना होता है इसमें बहुत सी शाखाएं होती है|इसकी पत्तियां एवं शाखों में छोटे-छोटे कांटे होते हैं|साथ ही यह पौधे की छोटी-छोटी लेटे भी होती हैं जो की कांटेदार स्वरूप में होती है|इसके छोटे एवं सफेद रंग के फूल होते हैं जबकि इसका स्वाद मीठा होता है| इसकी जड़ शकरकंद जैसे मोटे मोटे  गुच्छा में होते हैं|एक तने में गुच्छा में अनेको शकरकंद /मूली जैसे फल होते हैं|

इस लेख के माध्यम से हम शतावर\सतमूली के बारे में विस्तार से जानेंगे|आज हम इसके संपूर्ण विशेषता,लाभ,स्वाद,इसके बोलने के उच्चारण एवं इससे जुड़ी जितनी भी खास बातें हैं उनके बारे में सारी चीजों के बारे में चर्चा करेंगे|

Satawer /सतमूली का भारतीय आयुर्वेद जगत में औषधि के रूप में बहुत ज्यादा महत्व है| हम इसके बारे में भी संपूर्ण चर्चा करेंगे|

Satawer kya hai आयुर्वेद वनस्पति औषधि के रूप में इसका क्या महत्व है?What is shatavari! What is its importance as an Ayurvedic Medicinal Plant)

हमने ऊपर शतावर/सातमूली के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी हासिल की|विशेष रूप से शतावर एक वनस्पति है जो की प्राचीन काल से आयुर्वेद की दुनिया में प्रयोग में लाया जा रहा है|हमारे प्राचीन सिंधु संतों के द्वारा इसका इस्तेमाल भिन्न बीमारियों के इलाज के लिए भी प्रयोग में लाया गया था|

इस पौधे को शुरुआत में जंगली एवं पठारी भागों से प्राप्त किया जाता था परंतु इसकी महत्व एवं विशेषता को देखते हुए अब इसकी विशेष रूप से खेती भी की जाती है|आज इसकी मांग बहुत से स्वास्थ संबंधी दवावों के लिए किया जाता है|जो कि यह हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद साबित हो रहा है|

इसके अलावा यदि आपको इस पौधे को पहचान हो तो,मैं आपको इसके स्वरूप के बारे में भी बता देता हूं|यह पौधा अपने आप में विशाल एवं घना होता है|इसे गौर से देखने पर इसमें बहुत सी शाखाएं होती है|इसमें विशेष कर कांटेदार स्वरूप में होती है|इसमें छोटी-छोटी लटे होती है जिनमें कांटे होते हैं|यदि आपको इसे दूर से ही पहचाना हो तो इसमें सफेद रंग की छोटी-छोटी फूल लगे होते हैं जो इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं|आजकल लोग इसे अपने घरों में शो-पीस के लिए भी लगा देते हैं|

Satawer,शतावर के रासायनिक संगठन एवं महत्व (Chemical Composition and Importance of Shatavari (Asparagus racemosus )

शतावर एक विशेष प्रकार का आयुर्वेदिक वनस्पति औषधि है|इस पौधे की विशेषता यह है कि इस पौधे का सारा अंग ही औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है |

सबसे पहले हम इसके रस युक्त जड़ों से शुरुआत करते हैं|खासकर इसकी जड़ों  में पाई जाने वाली खास तत्व में शर्करा,श्लेष्मा एवं सेपोनेंट्स होते हैं|साथ ही इसके ताजे पत्तों एवं टहनियों से डियोसजैनिक,चारसेपेनिस(शतावरीन)

चौथ शतावरी में गायकोसाइट्स पाया जाता है|

इसके अलावा इसमें सारसा सेपोजेनिन नमक तत्वों की भरमार होती है|हालांकि इस पौधे में सारे तत्वों के अलावा इसमें ग्लूकोज घटक भी पाए जाते हैं|

Satawer का हमारे दैनिक जीवन में स्वस्थ लाभ एवं इसके आयुर्वेदिक औषधि के रूप में महत्वपूर्ण गुण(Health Benefits of Shatavari in Our Daily Life & Its Important Ayurvedic Properties)

शतावर ऐसे तो बहुत सारे गुण  से भरा होता है| जिसके कारण आयुर्वेदिक जगत में इसका औषधि के रूप में बहुत  मांग  है|यदि हम इसके महत्व को जानकर इसका अपने स्वास्थ्य के लिए प्रयोग करें तो हमारा स्वास्थ्य बेहतर हो जाएगा|

आईए हम शतावर/सतमूली की महत्वपूर्ण गुण को एक-एक करके जानते हैं|

इसका इस्तेमाल रसायन के रूप में किया जाता है

यदि हम इसके बारे में विस्तार से समझते हैं तो इस औषधि का प्रयोग जीवन को स्वास्थ्य बनाने ,आयु को दीर्घ बनाने वाली औषधि के रूप में विख्यात है|

खासकर आयुर्वेद जगत में इसका प्रयोग शरीर को ताकत,ऊर्जा,बुद्धि,स्मृति को तेज करने के साथ-साथ हमें विभिन्न प्रकार के रोगों से लड़ने में मदद करता है|इसके अलावा यह लंबी आयु के लिए भी सहायक होता है|

Satawer दिमाग  बढ़ाने और स्मरण शक्ति  को वृद्धि करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है

इससे हम शुद्ध हिंदी में मेधावर्धक भी कह सकते हैं|इस वनस्पति आयुर्वेद औषधि की विशेषता यह है कि ऐसे औषधि जो दिमाग को ऐसे आहार प्रदान करती है जो कि दिमाग को शक्ति,ही याददाश्त के साथ-साथ ध्यान केंद्रित करने का भी काम करती है|

पाचन प्रणाली एवं अतिसार जैसे समस्याओं के लिए

बहुत ही बेहतर समाधान माना जाता है|इस औषधि की विशेषता में से एक है यह शरीर के पाचन संबंधी समस्याओं को ठीक रखने में काफी सहायक होता है|यह आंतों में जो अतिरिक्त तरल पदार्थ को सोख कर हमारे मल को सामान्य करने का भी कार्य करती है|इसके अलावा यह दस्त के लिए बहुत ही उपयोगी होती है|साथ ही पाचन को सुदृढ़ बनाने में भी सहायक है|

स्तनपान करने वाली माताओं के लिए

वैसी माताए जो ब्रेस्ट फीड कराती हैंउनके लिए यह शतावर अमृत का काम करती है|इसके इस्तेमाल से दूध में भी वृद्धि होती है|

सबसे खास बात शतावर/सतमूली सबसे बड़ी गुण यही हैकी जो भी माताएं अपने बच्चों को स्तनपान कराती है उनके लिए दूध की मात्रा को बढ़ाने में बहुत मदद करती हैं|

शुक्र वर्धन के रूप मे

इसका मतलब है यह पुरुषों के लिए भी बहुत कारगर औषधि होता है|इसकी विशेषताओं में सबसे ज्यादा यह है कि यह वीर्य या प्रजनन क्षमता को बेहतर करने में सहायक होता है|

हृदय एवं मूत्र संबंधी समस्याओं के लिए इसका विशेष इस्तेमाल

यह औषधि को विशेष रूप से हृदय को बल देने वाली औषधि के रूप में जाना जाता है| साथ ही यह मूत्र से संबंधित अन्य रोगों के लिए भी काम आती है|उदाहरण के लिए यह मूत्र की मात्रा या फिर इसके प्रवाह को बढ़ाने वाली औषधि के रूप में भी जानी जाती है| साथ ही यह मूत्र को साफ भी रखती है|

Satawer /सतमूली का हमारे दैनिक जीवन में उपयोग एवं इससे होने वाली स्वस्थ लाभ(Use of shatavari in our daily life and its special benefits)

शतावरी/सतमूली का हमारे दैनिक जीवन एवं स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक एवं विशेष योगदान होता है|या एक ऐसी वनस्पति औषधि है जिसके इस्तेमाल से हमारे स्वास्थ्य पर बहुत ही ज्यादा कारगर असर करता है|भारतीय आयुर्वेदिक जगत में इसका इस्तेमाल मानव जीवन के कल्याण के लिए प्राचीन काल से ही किया जाता आया है|आज हम रासायनिक दावों के चक्कर में इन मुख्य औषधीय को भूलते जा रहे हैं परंतु इसका प्रमाण आज भी हमारे जीवन में उतना ही कारगर है जितना सदियों पहले हुआ करता था|

अपने दैनिक जीवन में इसका उपयोग किन-किन समस्याओं के लिए कर सकते हैं इसे हम एक-एक करके समझेंगे|

संभावित गर्भपात की स्थिति

मतलब की ऐसी कोई स्थिति हो जिसमें किसी महिला को लगता है कि गर्भपात की स्थिति बन रही हो, परंतु अभी तक नहीं हुआ हो| विशेष कार्य एक चिकित्सक चेतावनी के रूप में हो सकती है|

श्वेत प्रदर की समस्याओं से निजात पाने के लिए

सामान्यत: यह महिलाओं के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि मानी जाती है|इसका इस्तेमाल महिलाएं योनि से असामान्य रूप से अत्यधिक मात्रा में सफेद स्राव के रोकने के लिए भी इस्तेमाल कर सकती है|इसके सेवन से इन सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है|

सामान्य दुर्बलता एवं शरीर की कमजोरी या थकान संबंधी

इन समस्याओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है,इसमें किसी भी इंसान को यदि शारीरिक रूप से कमजोरी एवं हमेशा थकान रहती है तो वह इसका इस्तेमाल बेहिचक कर सकते हैं|

स्तनपान करने वाली माताओं के लिए

यह दूध पिलाने वाली माताओं के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि मानी जाती है| साथ ही यह दूध की मात्रा को बढ़ाने का कार्य करती है|

सर में होने वाले असामान्य दर्द के लिए

आजकल केव्यस्त जीवन में हर इंसान को तनाव एवं चिंता का सामना करना पड़ता है|जिसके कारण कभी-कभी हमारे सर में दर्द होने लगता है ऐसी समस्याओं के लिए Satawer, बहुत कारगर होता है|

मूर्छित होने पर

यदि किसी इंसान को अचानक से बेहोशी आती है या मूर्छित होता है तो उसे इसका सेवन जरूर करना चाहिए|

ब्लड प्रेशर नियंत्रित

ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है साथ ही यह पाचन प्रणाली संबंधित समस्याओं के लिए औषधि बहुत ही कारगर है|

Satawer शतावर/सतमूली का इस्तेमाल कैसे करें(How to Use shatavari)

शतावरी/सतमूली का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है|कुछ लोग इसका उपयोग औषधि के रूप में चूर्ण बनाकर,कुछ इसके गोली बनाकर एवं कुछ लोग इसे पीसकर इस्तेमाल करते हैं|आप इसे किसी भी रूप में प्रयोग करें, यह आपके लिए उतना ही फायदेमंद होगा|हम इसकी मात्रा की बात करें तो इसे सुबह शाम किस रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं?

विशेष कर इसका इस्तेमाल कैंसर प्रतिरोध के रूप में भी किया जाता है|यह औषधि कैंसर को रोकने या उनसे लड़ने की भी क्षमता रखता है|

आप इसके लिए इसकी मात्रा का ध्यान रखें| इसके लिए आपको चार चम्मच दिन में दो बार दूध के साथ एवं उसमें थोड़ी सी चीनी मिलाकर प्रयोग करने से बहुत लाभ मिलता है| इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है|

  • पेशाब में खून आना ऐसी समस्याओं के लिए भी यह बहुत कारगर साबित होती है|इसके लिए आपको इसके जड़ों के चूर्ण का विशेष भाग को एक चम्मच चूर्ण को दूध में उबाल कर,एवं चीनी के साथ मिलाकर प्रतिदिन लगभग तीन बार सेवन करने से पेशाब से खून आना बंद हो जाता है|
  • दस्त में खून आना जैसी समस्याओं के लिए शतावरी का ताजा चूर्ण को बकरी के दूध के साथ पीने से लाभ मिलता है|साथ ही बकरी के दूध एवं चावल के साथ सेवन से भी लाभ मिलता है|

कुछ लोगों में ऐसी समस्याएं आती है जिसमें पेशाब करते समय जलन या फिर दर्द होता है या साथ ही रुक रुक कर पेशाब आता है वैसे लोगों के लिए इसके जड़ों का चूर्ण बनाकर ठंडे पानी में मिलकर, इसका सेवन करने से लाभ मिलता है|

गले की समस्या में:-

जैसे बलगम,जुकाम जिससे गले में परेशानी आ रही होती है|इसका इस्तेमाल इसके जड़ों के चूर्ण बनाकर गोमूत्र के साथ इस्तेमाल करना चाहिए|

  • दृष्टि संबंधी समस्याओं के लिए,पाचन प्रक्रिया संबंधी,अमल आदि समस्याओं के लिए,साथ ही साथ स्त्री संबंधी समस्याओं के लिए,शुक्र दोष में शुक्राणु की कमी होने पर,वीर्य का पतला होना,नपुंसकता में, शतावर का विशेष इस्तेमाल होता है|

शतावर के कुछ महत्वपूर्ण दुष्प्रभाव एवं विशेष सावधानियां(Side Effect  and Precautions of shatavari)

शतावर ऐसे तो आयुर्वेदिक औषधि है|इससे ज्यादा मामलों में फायदे ही होते है पर कभी-कभी इसके सही मात्रा एवं सही समय पर चुनाव नहीं होने पर यह नुकसान कर सकता है|

  • विशेष कर छोटे बच्चों से दूरी बनाकर रखें, क्योंकि इन्हें एलर्जी हो सकती है|
  • साथ ही जो लोग किसी बीमारी के लिए दवाओं का सेवन कर रहे हो|

निष्कर्ष(Conclusion)

आज हमने इस लेख के माध्यम से शतावर के संपूर्ण परिचय लाभ हानि एवं आयुर्वेदिक जगत में इसके महत्व के बारे में विस्तार से जाना| हमने इसके विभिन्न समस्याओं में इसके इस्तेमाल एवं मात्रा को भी जाना |Satawer kya hai

कुल मिलाकर बात की जाए तो शतावर एक आयुर्वेदिक वनस्पति औषधि है|जो कि शुरू से ही मानव जाति के कल्याण एवं बीमारियों के लिए फायदेमंद रही है|यदि आप भी प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहना चाहते हैं तो आपको भी शतावर के बारे में सोचना चाहिए|साथ ही अपने स्वस्थ का ध्यान रखना चाहिए|

सवाल जवाब (FAQs)

Q.क्या मुझे रोजाना शतावर का इस्तेमाल करना चाहिए?Satawer

Ans. हां,आप रोजाना इसका इस्तेमाल कर सकते हैं,परंतु इसके चूर्ण को दूध में उबालकर पीने से ज्यादा लाभ मिलता है|

Q.क्या शतावर/सतमूली की खेती भी होती है?

Ans.हां बिल्कुल,पहले यह साधारणत: जंगलों एवं पहाड़ों पर मिलता था,परंतु इसकी आवश्यकता को देखते हुए,बढ़ती मांगों को देखकर इसकी खेती शुरू हो चुकी है|

Q.क्या यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है?

Ans.हां,यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है|साथ ही साथ रोग से लड़ने की ताकत प्रदान करता है|

Read Also:Atibala ke chamatkari labh https://imhoro.com/indian-mallowatibala-ke-chamatkari-labh/

Facebook :Imhoro communityhttps://www.facebook.com/profile.php?id=61575370258519

Written by Suraj Horo

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments