Asthisamharaka (harjor)इसे आयुर्वेदिक जगत के लोगों द्वारा इस्तेमाल होता है|या फिर पहले के लोगों के मुंह से यह सब सुनने को मिलता है|परंतु ऐसा नहीं है कि यह आज हमें कम सुनने को मिल रहा है तो इसका महत्व आज के तारीख में कम हो चुकी है|बिल्कुल नहीं|
परिचय(Introduction)

Asthisamharaka (harjor) जिसे हम साधारण भाषा में हर जोड़ी या फिर दीपन के नाम से भी जानते हैं|
मतलब साफ बनता है हर +जोड़ जिसका अर्थ है हड्डी को जोड़ने वाला|इंग्लिश में इसे Edible-stemmed vine कहा जाता है|
साथ ही हिंदी में Harjori के नाम से भी जाना जाता है|उसका विज्ञान(Botanical name) Syn. viti cissus quadrangularis linn .quadrangularis wall.VITACEAE के नाम से प्रचलित है|
खासकर यह आयुर्वेदिक वनस्पति औषधि ग्रामीण एवं जंगली क्षेत्र में आसानी से पाया जाता है|इसकी महत्व,मांग और उपयोगिता को देखते हुए अब इसकी व्यापक रूप से खेती भी की जाती है|
इस पौधे का स्वरूप ऐसा होता है कि यह एक संपूर्ण लता(बेल)ही होता है जो किसी पेड़ के सहारे या फिर किसी प्रकार की डड्डी अथवा खंबा आदि के सहारे लिपटकर ऊपर की ओर चढ़ती है|साधारणत: इसका तना चौकोना यानी की चार कोन आकार का होता है|साथ ही यह हरे रंग में होता है|इस पौधे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अंदर एवं बीच में दो गांठ से जुड़कर बनती है|मतलब यह पौधे की आकृति गांठ की जोड़ से मिलकर बनती है|
इस लेख के माध्यम से हम हरजोड़ के बारे में सारी जानकारी हासिल करते हैं| इस पौधे का आयुर्वेदिक जगत में क्या महत्व है साथ ही यह कहां मिलता है,इसके गुण एवं फायदे,इसके इस्तेमाल के बारे में विस्तार से जानेंगे|इसके अलावा भारतीय आयुर्वेदिक औषधि में इसका महत्व क्या है?
अस्थिसंहारी/ हरजोड़ क्या है?आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इसका क्या महत्व है?इसमें किन-किन रासायनिक संगठनो का मिश्रण पाया जाता है( what is Asthisamharaka (harjor).what is importance as an Ayurvedic Medicinal plant and chemical constituents found in asthisamharaka)
खासकर अस्थिसंहारी को हरजोड़ के नाम से ज्यादातर जाना जाता है |इसका इस्तेमाल ग्रामीण,देहात एवं पुराने जमाने के लोग ज्यादातर करते थे विशेष कर जब किसी इंसान या फिर पशुओं की किसी प्रकार से हड्डियों में टूट-फूट या फिर किसी प्रकार की किसी दुर्घटना होने पर इसका लेप बनाकर इस्तेमाल किया जाता था|यह प्राकृतिक इलाज माना जाता है|यह जंगली इलाकों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर पाया जाता है|
भारतीय आयुर्वेद औषधि की दुनिया में इसका विशेष महत्व होता है|धीरे-धीरे से लोग अब इसका महत्व को जानने लगे हैं|यह औषधि विभिन्न प्रकार के समस्याओं के समाधानों के लिए इस्तेमाल की जाती है|क्योंकि इसमें बहुत सारे रासायनिक संगठनों का मिश्रण पाया जाता है|आज इस लेख के माध्यम से अस्थिसंहारी(हर जोड़)के संपूर्ण महत्व के बारे में जानेंगे|इससे प्राप्त होने वाली मुख्य रासायनिक संगठनों के बारे में विस्तार से जानेंगे|
अस्थि संहारी (हर जोड़) एक ऐसा आयुर्वेदिक औषधि है जो हर तरफ से लाभ ही लाभ देता है|यदि हम रासायनिक संगठनों की बात करें तो इसमें सबसे पहले इस वनस्पति के कैरोटीन की मात्रा भरपूर पाई जाती है|साथ ही कैल्शियम ऑक्सलेट,विटामिन-C, अल्फा अमरीन,अल्फा एवं बीटा सीटोम टीरोल जैसे महत्वपूर्ण तत्वों का मिश्रण पाया जाता है|यह सारे गुण के द्वारा ही इस आयुर्वेदिक औषधि की प्रसिद्ध बढ़ी हुई है|
अस्थिसंहारी(हरजोड़ी) का हमारे दैनिक जीवन में स्वास्थ्य लाभ एवं इसके आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इसका महत्वपूर्ण गुण(The health benefits of astisanhari in our daily life and its important properties as an ayurvedic medicine)
साधारणत: अस्थिसंहारी(हरजोड़ी) को ज्यादातर लोग जानते हैं| क्योंकि इसका साधारण लोगों एवं आयुर्वेदिक जगत में इसका ज्यादातर इस्तेमाल किया जाता है| इसका इस्तेमाल निम्नलिखित गुण के लिए किया जाता है|
अस्थि संहारी (हरजोड़ी) पाचन प्रणाली को मजबूत करता है
सामान्यत: इस आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग भूख को तेज करता है| साथ ही पाचन शक्ति को बढ़ाने का काम करती है|इसे शुद्ध हिंदी या फिर आयुर्वेदिक भाषा में दीपन कहा जाता है|जिसे हम या तो हरे,सोठ या अजवाइन जैसे औषधियां काम करती है| इस प्रकार से यह कमजोर पाचन क्रिया वालों के लिए बहुत लाभदायक होती है|
पुरुषों में प्रजनन शक्ति को बढ़ाता है
इसके इस्तेमाल से पुरुषों में प्रजनन शक्ति को वृद्धि करने में सहायता मिलती है|क्योंकि यह वह औषधि है जो कि वीर्य को बढ़ाने का कार्य करती है |साथ ही प्रजनन क्षमता को भी बढ़ता है इसके अलावा यह औषधीय पुरुषों की वीर्य की गुणवत्ता,एवं संभोग क्षमता को बढ़ाने के लिए उपयोग की जाती है|
अस्थिसंहारी (हरजोड़ी) का उपयोग एवं इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ(Benefits of asthisanhari(harjor) in our daily life
Asthisamharaka (harjor)इसका उपयोग विभिन्न प्रकार की समस्याओं के लिए किया जाता है|साथ ही इससे हमारे जीवन में बहुत सारे लाभ मिलते हैं|इसे विस्तार से एक-एक करके समझते हैं|
टूटी हड्डी को जोड़ने में
बहुत बार ऐसी घटनाएं हो जाती है जिससे किसी इंसान को या दुर्घटनावश या कोई काम करते वक्त या फिर खेलते समय हड्डियां टूट जाती है ऐसे मौके पर अस्थिसंहारी (हरजोड़) बहुत ही कारगर औषधि के रूप में मानी जाती है|
इसके अलावा पालतू जानवरों के हड्डियों को जोड़ने के लिए यह सर्वोत्तम तरीका माना जाता है|
सांस से संबंधित समस्याओं के लिए
बहुत सारे लोगों को सांस संबंधी समस्याएं होती हैं,जिन्हें तुरंत थकान महसूस होती है|ऐसी समस्याओं के लिए भी यह कारगर औषधि मानी जाती है|
नेत्र रोग उपचार में
नेत्र संबंधी समस्याओं के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है|
गठिया के उपचार में
जिसको भी घुटने में दर्द होता है|वह भी इसका इस्तेमाल से जल्द ठीक हो सकते हैं|
लिगामेंट को मजबूत बनाने के लिए
विभिन्न प्रकार के समस्याओं के लिए
इसका इस्तेमाल कृमियों को नष्ट करने के लिए भी किया जाता है| खून में होने वाले पित्त नाशक के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है|स्कर्वी संबंधित समस्याओं के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है| साथ ही टूटी हुई हड्डियों को खासतौर से जोड़ने के लिए इसका हमेशा से इस्तेमाल किया जाता आया है|
Asthisamharaka (harjor)का इस्तेमाल कैसे करें(how to use Harjori )
मुख्य हिस्सा जो औषधि के लिए इस्तेमाल होता है
इसके जड़ों का:
इसके जड़ों को पीसकर इसका लेप लगाने से प्लास्टर के जैसा ही काम होता है |विशेष का टूटी हुई हड्डी में इसका लेप लगाया जाता है| सामान्यत: इसके तना को पीसकर इसका लेप को तीन दिनों तक इस्तेमाल से बहुत ज्यादा लाभ मिलता है|
इसके पत्तों के रस का इस्तेमाल
इसके पत्तों के रस का इस्तेमाल कान से खून आने एवं नाक से खून आने पर इसके पिसे हुए रस को डालकर इसका इलाज किया जाता है|
पाचन प्रणाली के लिए
पाचन क्रिया को बेहतर करने के लिए इसके तना एवं पत्तों का काढ़ा (जूस)बनाकर पिलाते हैं|इस प्रकार से इसके तन एवं पत्तों का रस खून को बढ़ाने वाला एवं खून को साफ करने का काम आता है|
हवा से होने वाले रोग
ऐसे रोग जो विशेष कर हवाओं के द्वारा फैलते हैं|साथ ही संचार एवं तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं |इसके लिए इसके तना के ऊपर से छाल निकालकर इसका चूर्ण बनाकर उरद के आटे में मिलाकर तिल के तेल से छानकर बनाने से विभिन्न प्रकार के वात रोग के लिए लाभ मिलता है|
टूटी हड्डी के लिए
टूटी हड्डी के लिए हरजोड़ में घी को पका कर सेवन करने से टूटी हुई हड्डियां जुड़ती है|
पेट संबंधी समस्याएं एवं सांस संबंधी समस्याओं के लिए
Asthisamharaka (harjor) के पत्तों एवं कोमल टहनियां को सुखाकर चूर्ण बनाकर सेवन करने से लाभ मिलता है| इसलिए इसे एक अतिरिक्त उत्तम रसायन के रूप में जाना जाता है|
इसका उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए तो किया जाता ही है साथ ही इसके पंचरग को सुखाकर और जलाकर इसकी राख का उपयोग बेकिंग पाउडर की तरह इस्तेमाल किया जाता है|
Note: महत्वपूर्ण बात हर जोड़ के बारे में बनारस कॉलेज के मेडिकल साइंस विभाग के डॉ K N उडुपा ने बहुत सारे महत्वपूर्ण जानकारी दी है|
हरजोड़ के दुष्प्रभाव एवं विशेष सावधानियां(Side effect and precautions of harjor
हर जोड़ आयुर्वेदिक औषधि हर समस्या के लिए उत्तम इलाज के रूप में जाना जाता है,परंतु इसके दुष्प्रभाव कि अगर बात की जाए तो सिर्फ इससे नुकसान यह है कि इसकी बगैर जानकारी के इसका विभिन्न रोगी में इस्तेमाल करना इसके लिए हानिकारक हो सकता है|
इसके लिए सबसे बड़ी सावधानियां यह है कि इसके किसी विशेषज्ञ की सलाह का ही पालन करना चाहिए अथवा उसकी देखरेख में ही इसका इलाज करना चाहिए|
विशेष कर बच्चों पर,गर्भवती महिलाएं एवं बुजुर्ग इसके प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की राय अवश्य लें|
निष्कर्ष(Conclusion)
इस लेख के माध्यम से हमने हरजोड़ों के बारे में संपूर्ण जानकारी दिया है|आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इसका महत्व,इसके स्वास्थ्य लाभ एवं इसके इस्तेमाल के बारे में जाना|साथ ही अंत में इसके सावधानियां के बारे में भी जाना|Asthisamharaka (harjor)
कुल मिलाकर हर जोड़ एक ऐसा आयुर्वेदिक औषधि है जो की सामान्यत: कम खर्चों में हड्डियों के टूटने के लिए एक बेहतरीन इलाज माना जाता है|क्योंकि यह वर्षों के अनुभव को बताया गया है|एक के लेखन होने के नाते मैं खुद अपने पालतू पशुओं के पैर टूटने पर इसका इस्तेमाल किया है और सच बताऊं तो इसका परिणाम बहुत ही जबरदस्त रहा है यह 15 से 20 दिनों में बेहतर असर करता है|
इसलिए मैं आपसे यही आग्रह करता हूं कि आप भी एक बार जरूर से इसका प्रयोग के बारे में जाने |
सवाल जवाब(FAQs)
Q.अस्थिसंहारी(हर जोड़) के इस्तेमाल से टूटी हुई हड्डियां जुड़ सकती है?
A.बिल्कुल,परंतु इसके इस्तेमाल के लिए आपको किसी प्रयोग के बारे में सही जानकारी का होना आवश्यक है|
Q.इसके प्रयोग से कितने दिनों में टूटी हड्डियां ठीक होती है?Asthisamharaka (harjor)
A. यह इसके चोट एवं टूटने की अवस्था पर निर्भर करता है|
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Written by Suraj Horo