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Babul ka ped kyun hai khas? Jane iske fayde aur istemal

Table of Contents

परिचय(Introduction)

Babul ka ped सामान्यत: एक कांटेदार वृक्ष होता है|जो की साधारणत: जिस जगह पर पानी की मात्रा कम होती है वैसे जगह पर ज्यादा उगता है| हिंदी में ज्यादातर इसे बबुल(कीकर) के नाम से जाना जाता है|साथ ही अंग्रेजी में इसे Indian gum tree के नाम से भी जाना जाता है|यह खास कर Acacia arabica (L)Del ssp Indica Brenen Syn. के नाम से भी जाना जाता है|इसका वैज्ञानिक(Botanical Name )acacia arabica lumk(mimosaceae) है|

Babul ka ped

इसकी विशेषताओं में सबसे ज्यादा यह है कि बबुल वृक्ष मध्यम आकार के होते हैं|इसके अलावा इस वृक्ष की पत्तियां छोटी-छोटी संयुक्त आकार की होती है| फूल बहुत खूबसूरत नजर आते हैं जो की चमकीले पीले एवं गोल स्वरूप और छोटे-छोटे होते हैं|

भारतीय आयुर्वेदिक जगत में बबुल का महत्व बहुत ही प्राचीन काल से उपयोग किया जाता आया है|इसका उल्लेख आयुर्वेद ग्रंथ में भी देखने को मिलता है|इस पौधे की समस्त अंगों का इस्तेमाल आयुर्वेद औषधि के लिए किया जाता है| आप यदि इसके शाखों को तोड़कर यदि रोजाना दातुन के रूप में इस्तेमाल करते हैं तो यह आपके दांतों एवं मसूड़े के लिए फायदेमंद होगा ही परंतु यह आपके समस्त शरीर एवं आपके पाचन प्रणाली को अंदर से स्वस्थ बनाता है|

इस लेख के माध्यम से बबुल के आयुर्वेदिक औषधि महत्व,इसके इस्तेमाल एवं महत्वपूर्ण लाभों के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करेंगे|

साथ ही इसे अपने जीवन में किस तरह से प्रयोग करें, ताकि हम इससे ज्यादा से ज्यादा लाभ उठा सके|इसके बारे में आज इस लेख में संपूर्ण जानकारी हासिल करेंगे|

बबुल क्या है?आयुर्वेदिक वनस्पति औषधि के रूप में इसका महत्व

Babul ka ped जिसे कुछ क्षेत्रों में कीकर के नाम से भी जाना जाता है|हमने थोड़ी देर पहले इसके अंग्रेजी नाम Indian Gum  tree को भी जाना,साथ ही इसके Botanical name एवं यह वृक्ष किस जाति में आता है उसके बारे में संपूर्ण जानकारी हासिल|हालांकि इस वृक्ष की खासियत यह है इस पालतू पशु जैसे गाय,बैल, बकरी एवं ऊंट इसे बड़े चाव से खाते हैं|क्योंकि इसके पत्तों का स्वाद जानवरों को बहुत अच्छा लगता है|

भारतीय आयुर्वेदिक जगत में बबूल के पेड़ का बहुत ही ज्यादा महत्व है|क्योंकि इसका उल्लेख आयुर्वेदिक ग्रंथ में भी किया गया है|तथापि इसका प्रयोग भी प्राचीन काल से ही किया जाता आया है|

यह वृक्ष ज्यादातर सड़क के किनारे,रेगिस्तानी इलाके,एवं पठारी इलाकों में ज्यादातर पाया जाता है|इस वृक्ष को बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है|इस वृक्ष का हर हिस्सा प्राकृतिक गुण से भरपूर है|

बबुल के रासायनिक संगठनों का मिश्रण

इस वृक्ष में किन-किन रासायनिक संगठनों का मिश्रण पाया जाता है|साथ ही इसमें किन तत्वों का मिश्रण होता है और हमारे लिए किस प्रकार से फायदेमंद साबित होगा|

यदि हम इसकी छाल की बात करें तो इसकी छाल में बीटा एमरीन, गैलिक अम्ल,कैटाचीन, लूकोसायनीन,पाया जाता है|साथ ही इसके फलों में गैलिक अम्ल,कैटाचीन,क्लोरोजेनिक अम्ल पाया जाता है|

हालांकि इस वृक्ष के गोद में गलेक्लोटोज, अरबीक अम्ल,कैल्शियम एवं मैग्नीशियम के लवण की मात्रा पाई जाती है|इसके अलावा इसके बीजों में एस्कार्मिक अम्ल,नियासिन,थायमिन एवं अमीनो अम्ल जैसे रासायनिक गुण की जबरदस्त मात्रा पाई जाती हैं|

बबुल की इन सारी आयुर्वेदिक गुण की वजह से यह आयुर्वेदिक औषधि जगत में काफी लोकप्रिय रही है|

बबुल(Indian Gum Tree)का हमारे दैनिक जीवन में स्वास्थ्य लाभ एवं इसके आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इसका महत्वपूर्ण लाभ

सामान्यत: बबुल हमारे दैनिक जीवन का बहुत ही अहम हिस्सा है|परंतु हम आज के जमाने की भाग दौड़ में हर आसान चीजों की तलाश में रहते हैं|हम इतना मेहनत नहीं करना चाहते,क्योंकि हमारे पास समय का अभाव होता है जिस कारण से हम आज आयुर्वेदिक औषधि एवं वनस्पति के महत्व से दूर होते जा रहे हैं,साथ ही हम बिल्कुल ही आसान तरीकों का इस्तेमाल करना चाहते हैं|उदाहरण के लिए साधारणत: हम रोजाना अपने मुंह को धोने के लिए या फिर दांतों की सफाई के लिए कोलगेट एवं टूथब्रष्ट का इस्तेमाल करते हैं जबकि लगातार टूथब्रश के प्रयोग से हमारे मसूड़े को हर बार नुकसान पहुंचता है|

इसके विपरीत यदि हम Babul ka ped में से,छोटी शाखों का दातुन के रूप में इस्तेमाल करें तो यह भी हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक साबित होगा क्योंकि इसमें सिर्फ हमारे दांत ही नहीं साफ होंगे, बल्कि हमारे मसूड़े भी सुरक्षित रहेंगे|

इस गुण को एक-एक करके विस्तार से जानेंगे|इसमें पर्याप्त मात्रा में पाए जाने वाले गुण|

यह एक ग्राही औषधि के रूप में जानी जाती है

इसका मतलब होता है कि यह हमारे शरीर के अतिश्राव को रोकने का कार्य करती है|साथ ही आत को भी मजबूती प्रदान करते हैं|यहां हमारे पाचन क्रिया को सुदृढ़ बनाने का काम करती है|साथ ही यह दस्त एवं अतिसार जैसे बीमारियों को रोकने का कार्य करती है|

यह शरीर को रोग बढ़ने वाली क्रीमी का नाश करती है

यह विशहर(जहर हटाने)  औषधीय की श्रेणी में आता है

हमारे शरीर के अंदर जितने भी अशुद्ध या अभिशप्त भोजन ग्रहण किए जाते हैं उन्हें या फिर उनके प्रमाण को नष्ट करता है|खासकर इस औषधि की खासियत  होती है कि जो शरीर में जहर के प्रमाण को कम करें या फिर पूरी तरह से समाप्त करती है|

यह सुजनों से मुक्ति दिलाता है

यह शरीर के विभिन्न प्रकार के सूजन से मुक्ति दिलाता है साथ ही सूजन को कम करता है|यह एक ऐसा प्राकृतिक वनस्पति है जो शरीर के अंदर हो रहे सुजनों के लिए बहुत ही विशेष औषधि के रूप में प्रचलित है|

कुष्ठ रोगी के लिए फायदेमंद

इन प्राकृतिक औषधि के इस्तेमाल से कुष्ठ रोग एवं त्वचा संबंधी समस्याओं से बहुत ही जल्द आराम मिलता है|

इस प्रकार से हमने बबुल के विभिन्न प्रकार के शारीरिक समस्याओं के समाधानों के बारे में विस्तार से जाना,इसके सिर्फ इतनी ही लाभ नहीं है इसके और भी अधिक लाभ जानने के लिए आप इस लेख में बने रहें|

बबुल का उपयोग एवं इससे होने वाली स्वस्थ लाभ

Babul ka ped उपयोग एवं इससे होने वाले विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य लाभों के बारे में विस्तार से समझते हैं|बबुल हमारे स्वास्थ्य के लिए हर प्रकार से उपयोगी होता है|बस हमें इसका सही इस्तेमाल का पता होना जरूरी होता है|

आज हम बबुल के विभिन्न प्रकार से होने वाले स्वस्थ लाभों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे|

चर्म रोग के लिए

आज के विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल से हमारा स्किन बहुत ही संवेदनशील हो चुका होता है|क्योंकि इसमें हम दिनों दिन विभिन्न प्रकार के पदार्थ का इस्तेमाल करते हैं|तो ऐसे में स्किन से एलर्जी एवं विभिन्न प्रकार के चर्म रोगों का खतरा बना रहता है|इन सभी समस्याओं से बचने के लिए बबूल सर्वाधिक समाधानों में से एक माना जाता है|

इसके अलावा शरीर में किसी हिस्से से अनियमित रूप से होने वाले रक्तस्राव को नियंत्रित करता है|

स्वास्थ संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद

श्वेत प्रदर,हड्डियों को टूट फुट,खून की अनियमित रूप से प्रवाह के लिए,सर्दी जुकाम एवं बहुत सारी ऐसी बीमारियां हैं जिन्हें दूर करने का काम करती है|

बबुल का इस्तेमाल कैसे करें

बबुल बहुत ही उपयोगी आयुर्वेदिक औषधि है| जिसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता है आपको बताते हैं इस वृक्ष के कौन सा हिस्सा किस काम में इस्तेमाल होता हैऔर आपका अपने जीवन में इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं|

इसके गोंद का इस्तेमाल

Babul ka ped का गोंद बहुत ही काम का होता है|इसका गोंद से पौष्टिकता मिलती है साथ ही मुंह के छाले से छुटकारा मिलता है|यदि आपको गले का सुखने संबंधित समस्या आती है तो इस चूसने से आराम मिलता है|इसके अलावा मूत्र संबंधी समस्याओं में भी बहुत आराम मिलता है| मधुमेह एवं अतिसार संबंधित समस्या से इसके सेवन से लाभ मिलता है|

बबुल के छाल का इस्तेमाल

इसके छाल को पीसकर इस्तेमाल करने से मुंह एवं मसूड़े से संबंधित सारी समस्याओं से आराम मिलता है|इसके अलावा दांतों का हिलना,गले की समस्या एवं सूजन से आराम मिलता है|साथ ही दस्त एवं अतिसार संबंधी रोगों से लाभ मिलता है|इसके लिए इसकी पत्तों को स्वरस  में मिलाकर पिलाने से अतिसार में लाभ मिलता है|

बबुल के पत्तों का इस्तेमाल

इसके पत्ते भी बहुत फायदेमंद होते हैं|इसे उबाल कर इसके रसों को छानकर,साथ ही इसकी दो फलिया खाकर ऊपर से छाछ पीने से फायदा मिलता है|इसके साथ ब्लड सर्कुलेशन में इसकी पत्तियों से काफी लाभ मिलता है|

इसके लिए इसके कोमल पत्तों के एक चम्मच रस में थोड़ा सा अरहर का चूर्ण मिलाकर सेवन करने चाहिए| इसका काढ़ा पीना अत्यंत लाभकारी माना जाता है जो कि पेट से संबंधित समस्याओं से राहत दिलाता है| 

मासिक धर्म में अनियमितता

पेट की समस्या,मुख से संबंधित समस्याओं के लिए Babul ka ped के छाल का काढ़ा में मिश्री मिलाकर पिलाना चाहिए|पाचन क्रिया की समस्या इत्यादि होने पर इसकी कोमल फलियों के अचार में सेंधा नमक मिलाकर खिलाने से इस समस्या से मुक्ति मिलती है|

मुंह से संबंधित रोग के लिए

जहां तक सवाल है मुंह से संबंधित समस्याओं का तो बबुल सबसे कारगर उपाय माना जाता है|इस समस्या को दूर करने के लिए इसकी छाल को या पानी में उबालकर इस पानी से कुल्ला करने से मुंह की समस्याओं का निवारण मिलता है|जबकि इसके दातुन या गोंद को मुंह में चबाने से भी मुंह के रोगों से मुक्ति मिलती है|इसके अलावा टॉन्सिल आदि समस्या में भी बबुल के छाल  के काढ़ा या फिर पत्तों के रस से कुल्ला जरूर करना चाहिए इससे बहुत फायदा है|

रक्तस्राव संबंधी समस्याओं में

शरीर के किसी भी अंग से रक्त स्राव होता है तो वैसे जगह पर ताजा कोमल पत्तों का रस का इस्तेमाल करना चाहिए|या फिर इसके विपरीत सूखे पत्तों या सूखी छाल का चूर्ण उसे पर छिड़क देना चाहिए|नतीजन बहुत आराम मिलता है|

बबुल हर तरफ से स्वास्थ के लिए एक बेहतर औषधि है

इसका नाम आयुर्वेदिक ग्रंथ में सबसे महत्वपूर्ण भागों में लिया जाता है अंत में इसके विभिन्न समस्याओं के समाधानों में गले की खराबी,उदाहरण के लिए खांसी में भी इसके पत्तों के रस चबाने से ठीक होता है|टूटी हड्डी के लिए,गर्भवती महिलाओं के लिए सूखे पत्तों का चूर्ण दो से चार ग्राम प्रतिदिन सुबह सेवन करने से सुंदर बच्चे का जन्म होता है| 

बबुल के दुष्प्रभाव एवं विशेष सावधानियां

सभी का स्वास्थ्य एक समान नहीं होने के कारण यह अलग-अलग फायदे एवं नुकसान कर सकता है| इसके कुछ सावधानियां के बारे में नीचे चर्चा करेंगे|

बबुल के कांटे

सबसे पहले Babul ka ped के कांटों की बात करेंगे,क्योंकि जब भी हमें किसी भी शारीरिक समस्याओं के लिए, बबूल  पेड़ में बहुत ज्यादा मात्रा में कांटे होती है |जो कि ज्यादातर नुकसान पहुंचाते हैं|हालांकि एक प्रकार से बात की जाए,तो यह पेड़ संपूर्ण ही कांटेदार वृक्ष की श्रेणी में आता है|बिना सावधानी के कभी भी बबुल के पेड़ के पास नहीं जाना चाहिए|

किसी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट नहीं

इसमें किसी भी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट तो नहीं है परंतु छोटे बच्चों,गर्भवती महिलाएं एवं वैसे बुजुर्ग जो किसी प्रकार की बीमारियों से पीड़ित हैं एवं दवा का सेवन कर रहे हैं|उन्हें इसके इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए|

निष्कर्ष(Conclusion)

इस लेख के माध्यम से बबुल के विभिन्न प्रकार के आयुर्वेदिक औषधि गुण के बारे में हमने विस्तार से जाना|साथ ही इसकी  गुण,लाभ,इसे किसी समस्या के लिए किस तरीके से इस्तेमाल किया जाए इन सभी बातों का हमने विस्तार से चर्चा की|

बबुल का प्रयोग आज ही नहीं इसका प्रयोग प्राचीन काल से ऋषि मुनियों द्वारा अपने बेहतर स्वास्थ्य के लिए किया जाता आया है|

कुल मिलाकर बात की जाए तो आपको अपने स्वास्थ्य में जरा भी सुधार करना हो, तो आपको ज्यादा कुछ नहीं बस बबुल के दातुन का प्रयोग रोजाना सुबह करके अवश्य देखना चाहिए| इस संदर्भ में आपसे इतना जरुर कहना चाहूंगा | यदि आपने 1 महीने तक भी इस आदत को लगातार किया तो आपके स्वास्थ्य में बेहतर परिवर्तन नजर आने लगेंगे|

तो चलिए क्यों ना आज से ही एक बेहतर स्वास्थ है के लिए रोज सुबह बबुल के दातुन से ही एक छोटी शुरुआत करें, और एक बेहतर स्वास्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाए|

(FAQs) सवाल जवाब

Q.क्या मैं रोजाना बबुल के दातुन का प्रयोग कर सकता हूं/सकती हूं?

A.हां बिल्कुल,आप रोजाना बबुल का दातुन कर सकते हैं|यदि आप इसके दातुन का प्रयोग बेहतर तरीके से किया तो आपको कभी भी मुंह से संबंधित समस्या नहीं आएगी|

Q.बबुल का काढ़ा पीने में बहुत कड़वा होता है क्या?

A.नहीं,यदि आपको उसे पीने में आशाए महसूस होता है तो उसे पर मिस्त्री का थोड़ा बहुत मिश्रण मिला सकते हैं|

Q.बबुल के कितने दिनों के इस्तेमाल से हमारे सेहत में असर दिखाई देगा?

A.जहां तक सवाल है!यह आपकी समस्या के आधार पर और आपके रोजाना के आदतों पर भी निर्भर करता है|

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Written by Suraj Horo

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