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Neem ke ped ke aushadhiya gun aur upyog

Table of Contents

परिचय

Neem के पेड़,साधारण भाषा में हम इसे नीम कहते हैं|आयुर्वेदिक जगत में नीम का पेड़ सदियों/प्राचीन समय से ही बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है|नीम का पेड़ एक ऐसा आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है जो शरीर के समस्त रोगों को समाप्त कर सकता है|इसके अलावा हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही उपयोगी दवा के रूप में महत्व रखता है|

Neem

Neem के पेड़ का संक्षिप्त परिचय

सामान्यत: हिंदी में नीम  एवं नींब भी कहा जाता है|अंग्रेजी में इसे Margosa tree(Nimb tree) के नाम से जाना जाता है|खासकर इसका वैज्ञानिक नाम Syn.Azadirachta Indica.A.juss.melia azadirachta lin है|यह MELIACEAE प्रजाति का पेड़ है|घरेलू उपचार की बात की जाए तो लगभग ज्यादातर बीमारियों में हम नीम के पेड़ एवं पत्तों का कहीं ना कहीं उपयोग जरूर करते हैं|

Neem के पेड़ की आयुर्वेदिक औषधि के रूप में बढ़ती विशेषता

नीम का पेड़ शुरुआत से ही आयुर्वेदिक जगत में एक मुख्य प्राकृतिक वनस्पति औषधि के रूप में इस्तेमाल होने वाले दवा के लिए मानी जाती है|इसका प्रयोग आदि काल समय से चली आ रही है|अभी भी लोग किसी भी प्रकार के छोटी-मोटे पेट या फिर मुंह की समस्या होने पर नीम के दातुन का प्रयोग करते हैं|

नीम की बढ़ती मांग का सबसे प्रमुख कारण यह है, कि आज के समय में ज्यादातर मुंह धोने के लिए प्रयोग में आने वाले टूथपेस्ट एवं नहाने के साबुन एवं विभिन्न प्रकार के शरीर में लगाने वाली क्रीम इत्यादि में नीम का प्रयोग किया जाता है| 

Neem के आयुर्वेदिक उपचार एवं विभिन्न प्रयोग

आईए इस पोस्ट के माध्यम से आज हम नीम के आयुर्वेदिक उपचार एवं विभिन्न प्रकार के प्रयोग के साथ-साथ इसमें पाए जाने वाले रासायनिक गुण,तत्व,इसके लाभ,आधुनिक विज्ञान में इसका महत्व एवं इससे जुड़ी समस्त जानकारी के बारे में|

इसके अलावा हमारे स्वास्थ्य जीवन में नीम का बेहतर प्रयोग कैसे कर सकते हैं|

Neem के पेड़ का आयुर्वेदिक औषधि के रूप में परिभाषा(The ayurvedic Medicinal definition of margosa tree)

नीम के पेड़ का महत्व शुरुआत से ही हमारे जीवन में स्वस्थ लाभों के लिए प्रयोग किया जाता आया है|हम इसका प्रयोग विभिन्न प्रकार के लाभों के लिए करते आए हैं साथ ही इससे होने वाले फायदे के बारे में भी जानते हैं|इसे आर्युवेदिक जगत में विशेष दर्जा प्राप्त है|

सामान्यत: नीम के पेड़ को हम,हिंदी में नीम या नींब  के रूप में जानते हैं|इसे अंग्रेजी में Margosa tree के नाम से जाना जाता है|हमने इसके वैज्ञानिक नाम जो किAzadirachta Indica.A.juss.melia azadirachta lin  के रूप में उल्लेखित है|यहMELIACEAE प्रजाति से संबंध रखता है|

नीम के पेड़ का स्वरूप एवं प्राप्त होने वाले स्रोत

एक विशाल वृक्ष होता है|सामान्यत: यह छोटे आकार से धीरे-धीरे बड़े वृक्ष के रूप में परिवर्तित होता है|जिसकी शाखाएं एवं उप शाखाएं फैली हुई होती है,इन शाखों के अंत में पत्ते होते हैं|इसके पत्ते विषम आकर के नुकीले एवं दंतुर किस्म के होते हैं|इसके फूल छोटे-छोटे एवं सुगंधित युक्त होते हैं|इसके फल बेरी के फल जैसे होते हैं|

इस प्रकार से हम नीम के पेड़ को एक प्राकृतिक आयुर्वेदिक वनस्पति के रूप में कह सकते हैं जबकि यह सामान्यत: कहीं भी पाया जा सकता है|ज्यादातर लोग इस वृक्ष को अपने आसपास लगाना पसंद करते हैं क्योंकि यह वृक्ष अपने वातावरण को शुद्ध रखता है|

नीम के पेड़ से उपयोगी भाग

हालांकि नीम का पूरा का पूरा पेड़ ही हमारे लिए बहुत उपयोगी होता है परंतु कुछ खास भाग हैं जो सर्वाधिक उपयोग में हमेशा से इस्तेमाल किए जाते हैं|

उदाहरण के लिए:-

  • नीम के पेड़ की छाल
  • शाखाओं की छाल
  • नीम के पत्ते
  • इसके फूल भी बहुत उपयोगी होते हैं|
  • नीम की छोटी-छोटी डालियों से दातुन
  • अंत में इसके कच्चे एवं पके हुए फल भी बहुत काम के होते हैं|

Neem के आयुर्वेदिक औषधि के रूप में रासायनिक गुण एवं स्वास्थ्य के लिए महत्व(The chemical properties and health benefit of neem as an ayurvedic medicine)

नीम हमारे दैनिक जीवन में बहुत ही उपयोगी होता है और इसके उपयोगी होने के बहुत सारे कारण होते हैं,क्योंकि सबसे खास बात यह है कि नीम में भरपूर मात्रा में रासायनिक तत्वों एवं गुणों की मात्रा भरी रहती है |

नीम में पाए जाने वाले रासायनिक गुण

इसमें मार्गोसिन,  निंबड़ीन,जैसे महत्वपूर्ण रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं|इसके अलावा इसमें गंधक,निबंन,नींबो स्टीरोल,टैनिन,उत्पत तेल,ग्लाइकोसाइड नाम के रासायनिक तत्व की जबरदस्त मात्रा होती है,साथ ही इसमें वसा अम्ल,गोंद,मुक्त अमीनो अम्ल,स्टार्च शर्करा जैसे गुण पाए जाते हैं|

जबकि इसके पत्तों में उपरोक्त गुणों के अतिरिक्त केरसेटिन,बेटा साइटोस्टीरोल (निंबा स्टीरोल) तत्व पाए जाते हैं|

  • नीम हमारे शरीर को विभिन्न प्रकार से प्रभावित करती हैं,नीम के पेड़,पत्तों एवं चल में बहुत सारे महत्वपूर्ण गुण पाए जाते हैं|इसे हमारे दैनिक जीवन में प्रयोग करने पर इससे विभिन्न प्रकार के स्वस्थ लाभ प्राप्त होते हैं|

Neem के पेड़ के आयुर्वेदिक औषधि रूप में उपयोग एवं इससे होने वाले विभिन्न फायदे(The use of the neem tree as an ayurvedic medicine and its various benefits)

नीम का पेड़ आयुर्वेदिक औषधि के रूप में हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है|इसके अलग-अलग प्रकार के स्वस्थ लाभ मिलते हैं|लिए उनके विभिन्न स्वास्थ्य लाभों के बारे में विस्तार से जानते हैं|

नीम के दीर्घकालीन स्वस्थ लाभ

सबसे पहले इसकी छाल की बात करें तो इससे निम्नलिखित लाभ एवं गुण मिलते हैं|

  • नीम का स्वाद कड़वा होता है,इसके प्रयोग से ऐसी औषधि का निर्माण होता है|जिससे शरीर को शक्ति,ऊर्जा एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता मिलती है|
  • नीम में विशेष प्रकार के औषधि गुण होते हैं जो शरीर में अतिसार (दस्त) जैसे समस्याओं को रोकने में सहायक होती है|
  • इसके प्रयोग से पेट साफ रहता है|जो की अत्यधिक मात्रा में शरीर को शुद्ध रखना है साथ ही यह तेजी से असर करने वाला औषधि के रूप में जानते हैं|
  • पेट के अंदर आंतों में नुकसानदेह कीटाणुओं को नाश करता है|
  • अंत में यकृत से संबंधित समस्याओं में समाधान पहुंचते हैं|

कुल मिलाकर कहा जाए तो नीम बहुत ही लाभदायक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में प्रयोग होने वाली दवा है|और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे शरीर एवं मन दोनों का संतुलन बनाकर रखती है|

जहां तक सवाल है नीम के पेड़ की,तो यह पूर्ण रूप से प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प माना गया है|इसके प्रयोग से किसी भी प्रकार की कोई भी साइड इफेक्ट का खतरा नहीं होता है|

नीम का हमारे स्वस्थ एवं दैनिक जीवन में उपयोग एवं लाभ

सबसे पहले इसकी छाल का प्रयोग सर्दी और जुकाम के नियंत्रण के लिए किया जाता है|सामान्यत: तथा शरीर में हो रहे अपच या विषैला तत्वों की वजह से यदि शरीर में जोड़ों में दर्द,सूजन और जकड़न संबंधी समस्याओं के लिए प्रयोग किया जाता है|

  • बुखार ठीक करने के लिए
  • शरीर में हो रहे दर्द एवं तकलीफ के लिए
  • नींद आदि समस्याओं के लिए
  • कैंसर के नाश के लिए
  • स्किन एलर्जी समस्या के लिए
  • इसके अलावा कीटाणुओं का नाश के लिए इसका प्रयोग किया जाता है|

हालांकि ज्यादातर मामलों में इनके पत्तों का इस्तेमाल खाज खुजली ,फफूंदी रोग ,प्रतिरोधी के लिए भी किया जाता है|

ज्यादातर मामलों में इसका प्रयोग खून को शुद्ध करने एवं साफ रखने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है|

इसके छालों का प्रयोग निम्नलिखित समस्या के उपचार के लिए

-मलेरिया में इसके छालों का चूर्ण बनाकर सेवन से लाभ मिलता है

-महिलाओं के लिए श्वेत प्रदर में नीम की छाल के साथ, बबुल की छाल का काढ़ा बनाकर पिलाने से लाभ मिलता है|

पत्तों का प्रयोग

इसके पत्तों से त्वचा से संबंधित रोगों से मुक्ति मिलती हैं|

कुष्ठ रोगों के निवारण में सहायक होता है|

साथ ही एक्जिमा में इसके पत्तों को पीसकर लगाने से लाभ मिलता है|

नीम के प्रयोग के लिए कुछ सावधानियां एवं सीमाएं(some precautions and limitation for the use of neem)

नाम बहुत ही कारगर आयुर्वेदिक औषधि है|यह पूर्ण रूप से प्राकृतिक वनस्पति और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सभी जगह पर आसानी से पाया जाता है|परंतु इसके इस्तेमाल से पहले हमें कुछ सावधानियां का पालन करना जरूरी होता है|साथ ही इसकी कुछ सीमाएं होती है|

विशेषज्ञ, बैध या फिर डॉक्टर की परामर्श के प्रयोग करें

क्योंकि हर इंसान का शरीर अलग होता है,यह किसी के लिए लाभदायक हो सकता है तो किसी के लिए नुकसान भी हो सकते हैं|

गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चों से दूर रखें

क्योंकि इसका स्वाद बहुत कड़वा होता है|इसे मुंह में डालते ही उल्टी हो सकती हैऔर जो भी व्यक्ति इसके प्रयोग को जानता है वहीं इसका प्रयोग करें| या फिर किसी जानकार से पूछ कर इस्तेमाल कर सकते हैं|

  • वैसे व्यक्ति जो किसी प्रकार से कोई भी बीमारी में मेडिसिन का इस्तेमाल कर रहे हो,वैसे लोग इसके सेवन से पहले एक बार डॉक्टर की राय अवश्य ले|

आधुनिक विज्ञान में नीम का आयुर्वेदिक मेल(The integration of neem ayurvedic properties in modern science)

नीम एक ऐसा आयुर्वेदिक औषधि है,जो कि वर्षों से इसका प्रयोग मानव जीवन में कल्याण के लिए किया जा रहा है|इसके अलावा भविष्य में भी इसका प्रयोग विभिन्न स्वस्थ लाभों के लिए किया जाएगा|

Neem का वैज्ञानिक शोधों द्वारा प्रमाणित औषधीय की जानकारी

नीम को आयुर्वेदिक विज्ञान ने अनेक प्रकार के औषधीय गुणों के लिए पुष्टि की है|

उदाहरण के लिए:-

1.जीवाणु रोधी गुणों के लिए (Antibacterial properties)

शोध:-Journal of Ethnopharmacology(2002) के अनुसार नीम की पत्तियों में जीवाणु रोधी गुण पाए जाते हैं|

2.एंटीवायरस और एंटीफंगल से बचने के लिए 

शोध:- NIH के रिपोर्ट के अनुसार,नीम HSV(Herpes Simplex virus)पर रोकथाम के लिए सक्षम पाया गया|

3.कैंसर रोधी गुणों के लिए(Anti Cancer Activity)नीम में उपस्थित nimbolide नामक तत्व कुछ प्रकार के कैंसर कोशिकाओं को बढ़ाने से रोकते हैं 

शोध:-BMC Cancer(2011) में इसे प्रकाशित किया गया था|

4.मुंह एवं दातों के रोग के इस्तेमाल के लिए:-

नीम का प्रयोग दांतों की समस्या,मुंह की दुर्गंध,मसूड़े की सूजन इत्यादि में भी इस्तेमाल की जाती है|

शोध:-Indian Journal of Dental Research(2014) में नीम से बने माउथवॉश को बेहतर माना गया है|

निष्कर्ष(conclusion)

हमने इस लेख के माध्यम से नीम के विभिन्न प्रकार के आयुर्वेदिक औषधियां के अलावा आधुनिक विज्ञान में हो रहे प्रयोग के बारे में भी विस्तार से जाना|इसके लाभों के बारे में जाना,इसके हमारे दैनिक जीवन में होने वाले लाभकारी महत्व को भी जाना|साथ ही इनसे जुड़ी हर बात को|

नीम का प्रयोग शुरू से ही किया जाता आया है और हम इसका प्रयोग आज भी कहीं ना कहीं किसी न किसी रूप में अवश्य कर रहे हैं यह एक बेहतर औषधि है|

इसलिए आप लोगों से मेरा अनुरोध है कि यदि आप अपने स्वास्थ के प्रति जागरूक होना चाहते हैं तो आपको नीम के बारे में सचेत हो जाना चाहिएऔर अपने दैनिक जीवन में इसका इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए|आप इसकी शुरुआत नीम के दातुन से ही कर सकते हैं|यदि आप एक या दो हफ्ते इसके दातून से अपने दांतों की सफाई करते हैं तो आपको आश्चर्य जनक रिजल्ट मिलेगा|इसके अलावा यदि आपको अपने स्वास्थ्य को और भी अधिक बेहतर बनाना है या फिर आयुर्वेदिक औषधि में विशेष रूचि हो तो आप हमारे वेबसाइट www.Imhoro.com पर स्वास्थ संबंधी सारी जानकारी हासिल कर सकते हैं|

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल(FAQs)

Q.क्या नीम का सेवन हर कोई कर सकता है?

A.हां बिल्कुल,इसे कोई भी कर सकता है|विशेष कर इसमें सुबह-सुबह अपने मुंह की सफाई नीम से कर ही सकते हैं|

Q.क्या इसके कोई साइड इफेक्ट होते हैं?

A.बिल्कुल नहीं,बस कुछ विशेष बातों को छोड़कर|

Q.इन्हें कहां से प्राप्त किया जा सकता है?

A.यह आसानी से कहीं भी मिल सकता है|या फिर आप इसे अपने घरों के आसपास भी लगा सकते हैं|

Q.क्या यह पूरी तरह से प्राकृतिक होती है?

A.हां बिल्कुल,यह पूर्ण रूप से प्राकृतिक एवं आयुर्वेदिक औषधि के रूप में जाने जाती है|

Read also:Daalchini ka upyog ayurveda me : ek prakritik aushadhiya ki puri jankarihttps://imhoro.com/dalchini-ka-upyog-ayurved-me-ek-prakritik-ausadhi-ki-jankari/

written by Suraj Horo

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