HomeNEW UPDATEYellow sarson ke Ayurvedic Labh:  Rogon se bachav ke prakritik tarike 

Yellow sarson ke Ayurvedic Labh:  Rogon se bachav ke prakritik tarike 

Table of Contents

परिचय(Introduction)

Yellow sarson,जिसे आयुर्वेद में सरसों या वैज्ञानिक रूप से Brassica Campestris var Sarson .prain के नाम से जाना जाता है|यह प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधिय पौधा माना गया है| इसका उपयोग आयुर्वेद में प्राचीन काल से मानव स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार के लिए किया जाता रहा है|

yellow sarson

Yellow sarson का संक्षिप्त परिचय

सरसों जिसे हिंदी में सर्पण या कटु स्नेह के नाम से भी जाना जाता है|इंग्लिश में इसे Yellow sarson /Indian colza/Rapeseed इत्यादि नाम से जाना जाता है |इसका वैज्ञानिक नाम Brassica Campestris var Sarson .prain है| साथ ही यह पौधा विशेष रूप से BRASSICACEAE(CRUCIFERAE) प्रजाति का है|सामान्यत: इसकी खेती होती है|सरसों का प्रयोग खाने के अलावा विभिन्न प्रकार के कार्यों में लाया जाता है| इसके अलावा इसका इस्तेमाल आयुर्वेद जगत में भी बेहतर तरीके से किया जाता है|

Yellow sarson की बढ़ती मांग

सरसों विभिन्न प्रकार से इस्तेमाल होने वाली बहु उपयोगी चीज है|

जिसका प्रयोग हम खाने के लिए करते हैं| साथ ही इसका प्रयोग हम स्वस्थ संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए भी करते हैं|सबसे ज्यादा इसका प्रयोग खाद्य पदार्थों के रूप में किया जाता है|

क्योंकि इसमें बहुत सारे स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने वाले गुणों की मात्रा होती है|

साथ ही यह हमारे सेहत के लिए एक लाभदायक सामग्री में आता है|

बिना सरसों तेल के हम अपने खाद्य पदार्थों की कल्पना नहीं कर सकते| 

सरसों की जानकारी

इस लेख के माध्यम से आज आपको सरसों के बारे में सारी जानकारी मिलने वाली है|खासकर सरसों के आकार प्रकार,इसका स्वरूप,किन क्षेत्रों से प्राप्त किया जाता है|इसके अलावा इसके रासायनिक गुण,तत्वों एवं इसका उपयोग कैसे किया जाता है|इसके अलावा इसकी सावधानियां,सीमाएं एवं आधुनिक विज्ञान में इसका महत्व के बारे में संपूर्ण जानकारी मिलने वाली है|

येलो सरसों के आयुर्वेदिक औषधि के रूप में परिभाषा(Definitions of yellow sarson as an ayurvedic medicine)

Yellow sarson को आयुर्वेद की श्रेणी में रखना

सरसों बेहद उपयोगी औषधि माना जाता है|यह विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य समस्याओं के निवारण के लिए लाभदायक है|

सबसे पहले हम इसके स्वरूप को जानते हैं|

खासकर इसकी खेती की जाती है|

यह एक छोटे एवं विभिन्न तनो, पत्तों वाले पौधे होते हैं|इसकी फूल पीले,जो की लंबी कलगी में होती है|

इसके अलावा इसके फल लंबी फलियों के रूप में होते हैं|सबसे महत्वपूर्ण बात-yellow सरसों का औषधीय गुणों के लिए विशेष कर,इसके बीज एवं तेल का प्रयोग किया जाता है|साधारणत: इसका स्वाद कड़वा होता है|

Yellow sarson को किन स्रोतों से प्राप्त किया जाता है

येलो सरसों की बहुतायत मात्रा में खेती होती है|साथ ही इसके पौधों को विभिन्न प्रकार के तरीकों से उगाया जाता है|

क्योंकि इसकी मांग बहुत ज्यादा होती है|इसका प्रयोग विभिन्न प्रकार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जाता है|

यह पूर्ण रूप से प्राकृतिक वनस्पति की श्रेणी में आता है|

सबसे खास बात यह की येलो सरसों खाद्य पदार्थ वाली सामग्री में ज्यादा प्रयोग में लाई जाती है|

परंतु इसका प्रयोग विभिन्न प्रकार के आयुर्वेदिक औषधि के निर्माण के लिए भी किया जाता है|

Yellow sarson के आयुर्वेदिक औषधि के रूप में रासायनिक एवं स्वास्थ्य के लिए विशेष महत्व(The chemical properties and health benefits of yellow sarson as an ayurvedic medicine)

Yellow sarson में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण रासायनिक सक्रिय गुण

पीला सरसों में बहुत प्रकार के रासायनिक सक्रिय गुणों की भरमार होती है|सबसे खास बात इसके बीच में सीनापिन नामक एल्कलॉइड्स है| जो कि हमारे सेहत के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण तत्वों में से एक माना गया है|इसके अलावा माइरोसीन,सीनीग्रीन के साथ-साथ आइनोसाइट्स एवं आल्ब्यूमिनस नाम के प्रमुख रासायनिक गुण की प्राप्ति होती है |यही नहीं इनके अलावा भी इसमें और बेहतर गुणों की मात्रा है|जैसे गोंद,रंगीन पदार्थ,उड़नशील तेल, एरोसिक एसिड प्रोटीन तथा स्थिरतैल|इसके अलावा भी बहुत सारे घटक पाए जाते हैं|

Yellow sarson का  हमारे शरीर पर बेहतर प्रमाण के साथ-साथ पाए जाने वाले गुण

इसके महत्वपूर्ण गुणों मे सबसे पहले तो इसका स्वाद कड़वा होता है|इसके साथ-साथ इसमें बड़ी खासियत, यह बहुत ही मुलायम,चिकना,कोमल एवं सौम्य होता है|इसके पत्तों को खाने से पाचन संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती हैं|इसके पत्तों को सब्जी के रूप में भी खाया जाता है|इसके पत्तों एवं बीजों के प्रयोग से स्वास्थ्य संबंधी बहुत सारे समस्याओं का निवारण होता है|उदाहरण के लिए इसके सेवन से यह काफी हल्का एवं सुरक्षित होता है| साथ ही शरीर की पाचन प्रणाली को सुदृढ़ करने के अलावा यह अपशिष्ट पदार्थों को आसानी से बाहर निकलता है|इसके बीजों में बहुत ही विशेष प्रकार के आयुर्वेदिक औषधि गुणों की मात्रा पाई जाती है|इसके अलावा इसके इस्तेमाल से शरीर में या त्वचा में होने वाली खुजली को दूर करती है|इसे हम खुजली नाशक औषधि के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं|

Yellow sarson के आयुर्वेदिक औषधि के रूप में उपयोग एवं इससे होने वाले विभिन्न फायदे(The use of the yellow sarson as an ayurvedic medicine and its various benefits)

पीला सरसों का आयुर्वेद की जगत में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है|क्योंकि यह विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए प्रयोग में लाई जाती हैं|हम अपने बिजी लाइफ की वजह से सिर्फ अभी तक सरसों के तेल के उपयोग के बारे में ही जान पाए हैं| परंतु येलो सरसों का प्रयोग कर घरेलू उपचार में विशेष रूप से किया जाता है|आईए हम पीला सरसों से के विभिन्न प्रकार के इस्तेमाल के बारे में अच्छी तरह से समझते हैं|

Yellow sarson का बेहतर उपयोग

सबसे पहले इसका प्रयोग हम स्वस्थ संबंधी समस्याओं के लिए देखते हैं|इसका प्रयोग कफ के निवारक के लिए किया जाता है|साथ ही इसके प्रयोग से शरीर में होने वाली वातनाशक समस्याओं के लिए किया जाता है|

  • इसकी विशेषता में यह रक्तपित संबंधी समस्याओं को ठीक करती है| जिसमें खून और पित दोनों को मिलाकर जो भी विकार उत्पन्न होती है|

जिसके कारण शरीर में रक्त का स्राव होता है|उदाहरण के लिए नाक से खून आना,उल्टी द्वारा खून आना,इसके साथ-साथ है यदि मल या मूत्र में खून आना,ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रयोग किया जाता है|

  • भोजन को पचाने के लिए इसका विशेष महत्व होता है|इसके सेवन से भोजन तुरंत पचता है|
  • इसके अलावा विभिन्न प्रकार की स्वस्थ समस्याओं के समाधान के लिए इसका विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है|
  • कुष्ठ रोगों में:- सरसों का तेल कुष्ठ रोगों में अति उपयोगी है|

Yellow sarson की विशेषता

  • श्लीपद(हाथ पैरों की असामान्य रूप से सूजन) में इस तेल का सेवन करना चाहिए-जिसे आगे चलकर आधुनिक चिकित्सा क्षेत्र में फाइलेरिया या हाथी पांव के नाम से जाना जाता है|
  • मिर्गी एवं तंत्रिका तंत्र रोगों के लिए:-

इसके लिए करंज के बीज एवं सरसों के बीज को पीसकर गोली बनाकर सुखाया जाता है|

साथ ही इन रोगियों की आंख में,अंजन करने से यह रोग नष्ट हो जाता है|

  • आमवत(जोड़ों के दर्द, सूजन एवं जकड़न)संबंधी समस्याओं के लिए सरसों के तेल को गर्म करके
  • पूजा(आरती) कपूर मिलाकर दांतों पर अंगुली से घिसना चाहिए|ऐसे में सभी प्रकार के दंत रोगों से लाभ मिलता है|
  • इसके अलावा वातरक्त में भी इसका प्रयोग किया जाता है|
  • साथ ही सरसों के पौधोंके कोमल पत्तों एवं इसके तनु का साग बनाकर खाना चाहिए|
  • साथ ही सरसों में तेल से मालिश करने से त्वचा संबंधी सभी विकारों से आराम मिलता है|

इसलिए सरसों के तेल के प्रयोग से स्वास्थ संबंधी सारी समस्याओं का हल मिलता है|

इसमें किसी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता|

और सबसे अच्छी बात है कि यह पूर्ण रूप से प्राकृतिक एवं सुरक्षित विकल्प माना जाता है|

Yellow sarson के प्रयोग के लिए कुछ विशेष सावधानियां एवं सीमाएं(some precautions and limitations for the use of yellow sarson)

Yellow sarson का हमारे दैनिक जीवन में बहुत ही विशेष महत्व होता है|इसके इस्तेमाल से हमें विभिन्न प्रकार के फायदे मिलते हैं|

हालांकि हमें इसके इस्तेमाल से पहले कुछ विशेष बातों का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है|

आईए इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों को समझते हैं| 

  • ऐसे तो सरसों पूर्ण रूप से प्राकृतिक एवं सुरक्षित विकल्प माना जाता है परंतु आपको इसके प्रयोग से
  • पहले किसी विशेषज्ञ अथवा जानकार लोगों से आवश्यक सलाह लेना चाहिए| क्योंकि हर किसी का शरीर अलग-अलग होता है|

आधुनिक विज्ञान में येलो सरसों का आयुर्वेदिक औषधि के रूप में मेल(The harmony between modern science and yellow sarson as an ayurvedic medicine)

1.वैज्ञानिक शोध:- सरसों के तेल में उपस्थित तत्व allyl isothiocyanate.को वैज्ञानिकों के अनुसार दर्द निवारक एवं सूजन के लिए बेहतर पाया गया|

औषधि के रूप में प्रयोग :-

  • आयुर्वेदिक औषधि में सरसों तेल का प्रयोग गठिया एवं शरीर की मांसपेशियों के दर्द में मालिश किया जाता है|
  • इसलिए आधुनिक दवाओं में इसे muscle relaxants और pain balm के रूप में प्रयोग किया जाता है|

2.कैंसर संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए(Anti-cancer)बहुत सारे वैज्ञानिक शोधों में पाया गया

कि सरसों में पाए जाने वाले यौगिक कैंसर प्रतिरोधी(chemopreventive) पाए जाते हैं|खासकर स्तन कैंसर एवं आंत कैंसर के लिए|

3.रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए:-

शोध:-अध्ययन में पाया गया की पीली सरसों में Anti-bacterial, anti fungalऔर antioxidant गुणों की मात्रा पाई गई है|

-जो कि इसके बीज एवं तेल त्वचा संक्रमण एवं फंगल रोगों के अलावा सांस संबंधी रक्षा के लिए उपयोगी माना गया है|

-खासतौर पर कई औषधीय का निर्माण जैसे herbal immunity boosters मैं भी सरसों के तेल में अर्क को मिलाया जाता है|

येलो सरसों को वैज्ञानिक शोधों द्वारा प्रमाणित

4.इसके अलावा कई वैज्ञानिक शोधों में पाया गया कि सरसों के बीज में पाचन शक्ति बढ़ाने के गुण पाए जाते हैं|

जैसे पेट की गैस,भूख की कमी इत्यादि में इसका प्रयोग किया जाता है|

5.बालों एवं त्वचा के लिए औषधि:-

शोध:-सरसों के तेल में मौजूद vitamin- E,Zincऔर selenium के गुण पाए जाते हैं|

जो की त्वचा एवं बालों के लिए बहुत ही लाभदायक होते हैं|

-त्वचा के रूखापन के लिए,बाल झड़ने की समस्याओं के लिए विभिन्न प्रकार के औषधि हेयर ऑयल और त्वचा संबंधी स्किन क्रीम में सरसों का प्रयोग होता है |

-यह वैज्ञानिक रूप से Antifungal और moisturizing होता है|

6.हृदय से संबंधित बीमारियों के लिए:-

सरसों के तेल मेंओमेगा 3 फैटी एसिड के साथ-साथ मोनो-ऑन-सैचुरेटेड फैट्स भी पाए जाते हैं |

यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर को भी बेहतर बनाता है|

कुछ प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं द्वारा किए गए अध्ययन

  • AYUSH मंत्रालय
  • राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान
  • CSIR(Council of Scientific and Industrial Research)
  • ICAR( Indian Council of agriculture research)

निष्कर्ष (Conclusion)

हमने Yellow sarson के बारे में संपूर्ण जानकारी दिया|

इस लेख के माध्यम सेहमने देखा कि येलो सरसों हमारे दैनिक जीवन मेंकिस प्रकार से लाभ पहुंचता है|

अंत में देखा जाए तो आपसे यही अनुरोध है कि यदि आप अपने स्वास्थ्य के प्रति गंभीर हैं तो आप भी सरसों का इस्तेमाल अपने दैनिक जीवन में कर सकते हैं|आयुर्वेद से संबंधित जानकारी के लिए आप हमारे वेबसाइट www.Imhoro.com पर visit कर सकते हैं|

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q.क्या पीला सरसों का सेवन शिशुओं के लिए सही है?

A. बिल्कुल,सरसों का सेवन शिशु के लिए बहुत बेहतर माना जाता है|इसके मालिश से हड्डी और मांसपेशियां दोनों मजबूत होते हैं|

Q.इन्हें कहां से प्राप्त कर सकते हैं?

A.कोई भी ग्रॉसरी स्टोर से |

Q.क्या यह पूरी तरह से प्राकृतिक है?

A.बिल्कुल |

Q.सरसों के कोई साइड इफेक्ट होते हैं क्या?

A.बिल्कुल नहीं| 

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written by Suraj Horo

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