परिचय
Gyanesh Kumar,बिहार FIR और वोट चोरी के आरोपों पर सड़क से संसद तक घमासान लड़ाइयां चल रही है|कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी का आरोप लगाकर सियासी बम फोड़ा है|अब इसका जवाब देने के लिए चुनाव आयोग खुद सामने आया है|

Gyanesh Kumar क्या है मामला
जब से राहुल गांधी ने यह कहा कि भारत का प्रधानमंत्री वोट चोरी करके प्रधानमंत्री बन बैठा है|
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को भी ललकारा है|
राहुल गांधी ने कहा कि अगर चुनाव आयोग में हिम्मत है तो चुनाव आयोग हम को हटा दें |
हम यह साबित कर देंगे कि नरेंद्र मोदी वोट चोरी करके प्रधानमंत्री बने हैं|
राहुल गांधी ने वोट चोरी का आरोप लगाया तो लोग सड़कों पर उतरकर वोट चोर,कुर्सी छोड़ो के नारे लगा रहे हैं|
कुछ वीडियो ऐसी भी सामने आई, जहां पर भाजपा की रैली में, यह नारे लगा रहे हैं|
कि “वोट कर कुर्सी छोड़”तो क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुश्किलें बढ़ जाएगी|
आखिर कौन हैGyanesh Kumar
एक उच्च शिक्षित परिवार से आने वाले ज्ञानेश कुमार का एक लंबा और प्रभावशाली कैरियर रहा है|
फिलहाल Chief Election Commissioner हैं|
जो मूल रूप से UP के आगरा निवासी ज्ञानेश कुमार 1988 के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं|
केरल की राजधानी तिरुवंतपुरम में DM के रूप में पहली बार सेवा का मौका मिला|
उनके परिवार के कई लोग भारत के विभिन्न जगहों पर कई उत्पादों पर आसीन है|आपको यह जानकर ताजुब होगा कि ज्ञानेश कुमार के घर में 28 लोग डॉक्टर हैं|इसके अलावा कई लोग प्रशासनिक सेवा में भी हैं|
कौन है Gyanesh Kumar
ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त बनाए गए हैं|जिनका जन्म स्थल आगरा है|
इनके पिता डॉक्टर सुबोध कुमार गुप्ता और मां सत्यवती गुप्ता,विजयनगर कॉलोनी में रहते हैं|
हालांकि फिलहाल ही उनके पिता चिकित्सा पदाधिकारी के पद से रिटायर हुए हैं|इनके पिता जो की एक सरकारी अधिकारी थे,
जिसकी वजह से तबादले होते रहे| इस वजह से उनकी शिक्षा गोरखपुर,लखनऊ और कानपुर में हुई|
ज्ञानेश के परिवार में ज्यादातर चिकित्सक हैं|साथ ही उनकी बेटी IAS और दूसरी बेटी IRS है|
पूरा नाम एवं शिक्षा
ज्ञानेश बचपन से ही प्रतिभाशाली थे|वाराणसी के क्वींस कॉलेज में वह टॉपर रहे|12वीं उन्होंने लखनऊ के केल्विन तालुकदार कॉलेज से की|यहां भी इन्होंने टॉप किया|इसके बाद IIT कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में B. Tech किया|इसके बाद वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने दिल्ली चले गए|जहां उन्होंने 1 साल हुडको में भी काम किया|
करियर की शुरुआत
1988 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और केरल कैडर के IAS अधिकारी बन गए|उनकी पहली नियुक्ति तिरुवंतपुरम में बतौर DM मिला|उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया है|आपको बता दे की UP सरकार के कार्यकाल में 2007-2012 तक वह रक्षा मंत्रालय रक्षा सचिव रहे|2014 में वह केरल सरकार के दिल्ली में रेजिडेंट कमिश्नर थे|इस्लामिक स्टेट की हिंसा गतिविधियों के बीच उन्होंने 183 भारतीयों को इराक से निकलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई|
प्रशासनिक सेवा
उनकी प्रशासनिक सेवा का करियर 1988 में सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद से शुरू हुआ|जिसमें इन्हें केरल कैडर के IAS अधिकारी के रूप में पहली नियुक्ति मिली|जहां इन्हें तिरुवंतपुरम में बतौर DM का पद मिला|इसके साथ ही 2007 से 2012 तक वह रक्षा मंत्रालय के संयुक्त रक्षा सचिव भी रहे|2014 में वह केरल सरकार के दिल्ली में रेजिडेंट कमिश्नर भी रहे|
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त(CEC) के रूप में भूमिका
भारत के एक मुख्य चुनाव आयुक्त वरिष्ठ IAS अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने अपनी काबिलियत से केंद्र सरकार के फैसलों को लागू करने में बड़ी भूमिका निभाई|
Gyanesh Kumar जिम्मेदारियां एवं कर्तव्य
चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को केंद्र सरकार ने, श्री राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया था|वह बाल स्वरूप के भगवान श्री राम की मूर्ति चयन के निर्णायक मंडल में भी रहे|ज्ञानेश कुमार जिन्होंने सहकारिता सचिव संसदीय मामलों के सचिव के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई|इसके अलावा इन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न प्रकार के सहकारिता मंत्रालय एवं समितियां के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है|
चुनाव आयुक्त में उनकी भूमिका
ज्ञानेश कुमार को 19 फरवरी 2025 को नए भारत के नए मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया|जहां पर उनकी भूमिका स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से चुनाव कराने के लिए होती है|यह एक विशेष रूप से संवैधानिक निकाय होता है|भारत में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को विशेष रूप से भारत के राष्ट्रपति के द्वारा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सदस्यों के द्वारा विशेष सिफारिश पर ही चुनी जाती है|
लोकतंत्र में CEC का योगदान
लोकतंत्र में CEC पूरे भारत के चुनाव आयोग से सबसे प्रमुख पदों पर होते हैं|जो की विशेष रूप से भारत की राष्ट्रीय विधायिका एवं राज्य के विधानसभाओं एवं विभिन्न मामलों के मुख्य संवैधानिक निकायों के चुनाव करने के लिए होते हैं|
Gyanesh Kumar की प्रमुख उपलब्धियां
ज्ञानेश कुमार जनवरी 2024 में सहकारिता मंत्रालय के सचिव के रूप में सेवानिवृत हुए|इसके बाद उन्हें चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति मिली|सहकारिता मंत्रालय से पहले उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय में कई दायित्वों को संभाला था|
चुनाव सुधार में योगदान
ज्ञानेश कुमार ने केरल सरकार में रणाकुलम के सहायक कलेक्टर अदूर के उप कलेक्टर ST,SC के लिए केरल राज्य विकास निगम के प्रबंध निदेशक कोचिंग निगम के नगर आयुक्त के अलावा अन्य पदों पर भी काम किया है|
पारदर्शिता और निष्पक्षता की पहल
केरल सरकार के सचिव के रूप में ज्ञानेश कुमार ने वित्त संसाधन फास्ट ट्रैक परियोजनाओं और लोक निर्माण जैसे विभागों को संभाला है|इसके अलावा ज्ञानेश कुमार को भारत सरकार में रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिवगृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव संसदीय मामलों के मंत्रालय में सचिव और सहकारिता मंत्रालय सचिव के रूप में काम करने का मौका मिला|
इनके द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदम
इनके द्वारा उठेगा महत्वपूर्ण कदमों में, खासकर अनुच्छेद 370 हटाने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल रहे|साथ ही इन्होंने गृह मंत्रालय में भी बढ़-चढ़कर काम किया|इसके साथ संसदीय कार्य मंत्रालय में भी काम किया|
कार्यकाल एवं चुनौतियां
इनकी कार्यकाल की शुरुआत प्रशासनिक सेवा के रूप में हुई|
जो आगे जाकर भारत के विभिन्न मंत्रालयों की सेवाओं के रूप में जारी रही|
इन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बहुत सारी विशेष कार्यों में योगदान दिया है|
कार्यकाल की अवधि
ज्ञानेश कुमार जिनकी शुरुआत प्रशासनिक अधिकारी के रूप में 1988 से हुई थी|
जो कि साल 2024 में रिटायर होने के बाद, एक नए मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में चुने गए|
जिस वजह से इनका कार्यकाल बहुत ही लंबा रहा है|
चुनाव के दौरान आने वाली चुनौतियां
चुनाव के दौरान इन्हें बहुत सारे चुनौतियां देखने को मिली|
परंतु इन्होंने धीरे-धीरे सारी चुनौतियों को एक-एक करके अच्छी तरह से समझाया|
तकनीकी और राजनीतिक चुनौतियां
तकनीकी एवं राजनीतिक मामलों को देखा जाए, तो खास बात यह है कि जो केंद्रीय मंत्रिमंडल के PM Narendra Modi के बाद,निर्विवाद रूप से No.2 माने जाते हैं|ऐसे में ज्ञानेश कुमार को अमित शाह की निकटता हासिल थी|ज्ञानेश कुमार ने संसदीय कार्य मंत्रालय सचिव के रूप में भी काम किया है|
भारतीय लोकतंत्र में महत्व
इनकी खास बात यह है, कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के दौरान वह रक्षा मंत्रालय में तैनात थे|
26th मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान ज्ञानेश कुमार
इस साल के अंत में बिहार विधानसभा चुनाव और 2026 में केरल और पुडुचेरी विधानसभा की देखरेख करेंगे|
जनता के लिए Gyanesh Kumar भूमिका
ज्ञानेश कुमार इस बार तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की देखरेख करेंगे|
जो 2026 में होने वाले हैं|ज्ञानेश कुमार पहले सहकारिता मंत्रालय के सचिव थे|
इन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल रहे हैं|
निष्पक्ष चुनाव कराने में योगदान
अगस्त 2019 में ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय में कश्मीर डिविजन के संयुक्त सचिव थे |
इस दौरान उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के साथ मिलकर काम किया|
इस संवेदनशील मामलों को सुलझाने में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है|
निष्कर्ष
कुल मिलाकर ज्ञानेश कुमार का एक लंबा और प्रभावशाली प्रशासनिक करियर रहा है|अनुच्छेद 370 हटाने के दौरान ज्ञानेश की भूमिका बेहद आम थी|
Gyanesh Kumar का समग्र योगदान
2020 में ज्ञानेश कुमार को गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया|
उन्हें अयोध्या मामले से जुड़ी सभी मामलों की जिम्मेदारी दे दी गई थी|इसमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन भी शामिल था|
उन लोकतंत्र को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका
सुप्रीम कोर्ट में फैसले के बाद सभी कार्य इनकी देखरेख में हुए|यह एक और महत्वपूर्ण भूमिका थी जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक निभाया|
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written by Suraj Horo